कहते हैं कि एक इंसान अगर ठान ले तो वह क्या नहीं कर सकता। फिर चाहे वह दिव्यांग ही न क्यों हो। उसका हौंसला ही उसका साथ देती है। ऐसा ही एक दिव्यांग हमें सोमवार की दोपहर फोरलेन पर रामनगर कड़जहां के पास मिला।
चंडीगढ़ में रोजगार छीनने के बाद एक दिव्यांग ट्राई साइकिल से ही घर जाने के लिए निकल चुका है। सोमवार को आठ दिन बाद वह गोरखपुर पहुंचा। फोरलेन पर ही सड़क के बीच में लगे फूल पत्ती के पेड़ों के नीचे थोड़ा आराम किया और आगे के सफर पर निकल गया।
सोमवार की दोपहर करीब 1 बजे फोरलेन पर रामनगर कड़जहां के पास ट्राई साइकिल चलाते हुए आता हुए एक शक्स दिखा। संवाददाता ने उसे रोककर पूछा तो उसने बताया कि वह बिहार के मोतिहारी निवासी सुनील कुमार है और वह अपने गांव जा रहा है।
बताया कि वह चंडीगढ़ के सेक्टर आरवी में पान, मसाला आदि की दुकान चलाता था। लॉकडाउन की वजह से दुकान बंद हो गई। पहले की बिक्री का जो रुपया था धीरे-धीरे समाप्त हो गया। जब उसके पास कोई रास्ता नहीं बचा तो हार मानकर बीते दस मई को वहां से गांव के लिए ट्राई साइकिल से चल दिया।
उसने बताया कि जेब में केवल दो सौ रुपये ही थे। वह भी समाप्त हो गया। जगह-जगह प्रशासन, पुलिस व समाजसेवियों के द्वारा बांटे जा रहे भोजन के पैकेट, पानी के बोतल व पाउच, बिस्किट आदि से ही पेट भर रहा है। रास्ते में ही सड़क किनारे जहां थोड़ी छांव मिली वहीं कुछ देर आराम कर लिया। फिर आगे के लिए निकल जा रहा हूं।