मथुरा-छपरा एक्सप्रेस (22532) को भाटपार रानी स्टेशन पर स्टॉपेज के बावजूद ग्रीन सिग्नल दे दिया गया। इससे ट्रेन होम सिग्नल को पार करके यार्ड में पहुंच गई। ट्रेन का स्टॉपेज होने के बाद भी ग्रीन सिग्नल मिलने पर गार्ड और चालक को गड़बड़ी की आशंका हो गई।
दोनों ने आपस में बात कर ट्रेन को रोकने का निर्णय लिया लेकिन, तब तक ट्रेन प्लेटफार्म छोड़कर मेन लाइन पर जा चुकी थी। इससे यात्रियों में अफरातफरी मच गई। सामान लेकर यात्री मेन लाइन पर ही चढ़े और उतरे। रेल प्रशासन ने मामले की जांच शुरू करा दी है।
जानकारी के मुताबिक मंगलवार की देर शाम ट्रेन भाटपार रानी स्टेशन के आउटर पर पहुंची तो सिग्नल पीला होने (प्लेटफार्म पर रुकने) के बजाय ग्रीन (स्टेशन पर बिना रुके बढ़ जाना) मिला। यह देख लोको पायलट (चालक) ब्रज भूषण ने वॉकी-टॉकी पर गार्ड शीतल प्रसाद से संदेह जाहिर किया और ट्रेन के स्टॉपेज की जानकारी ली।
गार्ड के कहने पर ट्रेन को रोकने का निर्णय लिया गया और इसकी सूचना स्टेशन मास्टर को दी। इस बीच ट्रेन होम सिग्नल को पार कर यार्ड में पहुंच गई और प्लेटफॉर्म की जगह मेन लाइन पर जाकर रुकी। इस दौरान यात्रियों ने जमकर नाराजगी जताई।
गार्ड शीतल प्रसाद ने बताया कि मामले की जानकारी उन्होंने परिचालन प्रबंधक और लोको पायलट ने यांत्रिक इंजीनियर को दी। दोनों ने लिखित बयान भी दिया है। घटना की जानकारी होने के बाद रेलवे प्रशासन ने जांच शुरू करा दी है।
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने कहा कि मथुरा-छपरा एक्सप्रेस को प्लेटफॉर्म की जगह मेन लाइन पर रोका गया। किन कारणों से ऐसा किया गया है, इसकी जांच के लिए एक कमेटी गठित की गई है। जांच शुरू हो गई है, रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
क्या है मेन लाइन
मेन लाइन को रेलवे की भाषा में थ्रू लाइन भी कहा जाता है। इस लाइन से स्टेशन पर बिना रुके गुजरने वाली ट्रेनों को गुजारा जाता है। इस लाइन के अगल-बगल कोई प्लेटफार्म नहीं होता। प्लेटफार्म न होने से इस लाइन पर यात्रियों के चढ़ने-उतरने से हादसे की आशंका भी होती है।