उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में रिश्वत देकर सरकारी नौकरी हासिल करने के चक्कर में एक युवक और एक युवती ने 17 लाख रुपये गंवा दिए। आरोप है कि, जालसाजी की जानकारी होने के बाद आरोपी की काफी तलाश की, लेकिन कहीं पता नहीं चला। रुपए गंवाने वाले दोनों लोगों ने पीपीगंज थाने में तहरीर दी है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।
जानकारी के मुताबिक, पीपीगंज इलाके के तिघरा निवासी मोनू सिंह और गोरखपुर की सबीना खातून बेरोजगार हैं। दोनों रोजगार की तलाश में थे कि इसी दौरान उनकी मुलाकात पीपीगंज इलाके के रामनगर निवासी एक युवक से हो गई। उसने उनको सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा दिया और दोनों गलत तरीके से नौकरी हासिल करने के लिए राजी भी हो गए।
जालसाज ने दोनों को बताया कि उनकी नियुक्ति पहले संविदा पर होगी। बाद में उसे स्थाई नियुक्ति मिल जाएगी। इसके बदले में जालसाज ने उनसे साढ़े आठ-आठ लाख रुपये की मांग की। सरकारी नौकरी मिलने की उम्मीद में छह माह पहले कथित पीड़ितों ने रुपये का इंतजाम कर उसे दे दिए। बदले में जालसाज ने उन्हें लखनऊ सचिवालय में नियुक्ति पत्र भी दे दिया।
नियुक्ति पत्र लेकर वे जब संबंधित कार्यालय में पहुंचे तब जाकर उन्हें ठगी का शिकार होने का पता चला। शनिवार को मोनू सिंह ने थाने पहुंचकर इस संबंध में जालसाज के खिलाफ तहरीर दी है। थानेदार राजेंद्र मिश्र ने बताया कि तहरीर मिली है, मामले की छानबीन की जा रही है।
कानून की खामी है, वरना पीड़ितों को भी जाना चाहिए जेल
ऐसे मामलों में जालसाजी का शिकार होने वाले लोग वास्तव में धोखाधड़ी जैसे अपराध के जनक हैं। उन्हें पता है कि रिश्वत देकर नौकरी पाना गलत है, मगर फिर भी वे ऐसा करते हैं। जालसाल उनके इसी लालच का फायदा उठाते हैं। बाद में रुपए गंवाने पर गलत तरीके से नौकरी पाने का मंसूबा पाले लोग पीड़ित बन जाते हैं। कानून में उनके इस अपराध के लिए दंड का प्रावधान नहीं है, वरना जालसाज के साथ वे भी जेल में होते।