सीएम योगी ने किया गोरखा युद्ध स्मारक और संग्रहालय का शिलान्यास
ब्रिटिश भी नहीं कर पाए थे गोरखा सैनिकों का सामना, संधि के लिए होना पड़ा था मजबूर
गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि स्वतंत्र भारत में गोरखा सैनिकों ने अलग-अलग मोर्चों पर कार्य किया। जहां भी उन्हें लगाया गया, वहां उन्होंने पूरी बहादुरी से भारतीय सेना का हिस्सा बनकर शत्रु को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। उन स्मृतियों को यहां जीवंत बनाने, आने वाली पीढ़ी को प्रेरणा देने और भारत-नेपाल के बीच आध्यात्मिक व राजनीतिक रिश्तों को और मजबूत करने के नए आयाम की शुरुआत हो रही है।
मुख्यमंत्री बृहस्पतिवार को गोरखा रेजिमेंट के गोरखा भर्ती डिपो (जीआरडी) गोरखपुर में स्थित गोरखा युद्ध स्मारक के सुंदरीकरण और भव्य संग्रहालय (म्यूजियम) के शिलान्यास के बाद उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे।
सीएम ने कहा कि अपने गौरव का सम्मान देकर ही कोई जाति आगे बढ़ सकती है। 100 साल पुराने स्मारक को एक नया स्वरूप दिया जा रहा है। जब गोरखा रेजिमेंट आई थी, उस समय के यूनिफॉर्म और अस्त्र-शस्त्र में समय-समय पर क्या परिवर्तन हुए, यह जानकारी आने वाली और वर्तमान पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगी। इस पूरे स्मारक और म्यूजियम के माध्यम से एक नया अध्याय प्रस्तुत किया जाएगा।
शिव और शक्ति का समन्वय ही जीवन का रहस्य
सीएम योगी ने कहा कि वर्ष 1816 में अंग्रेजों और गोरखा सैनिकों के बीच युद्ध हुआ था। अंग्रेज लड़ नहीं पाए और उन्हें संधि करने पर मजबूर होना पड़ा। इसके बाद उन्होंने गोरखा सैनिकों के लिए सेना के द्वार खोल दिए थे। गुरु गोरखनाथ की परंपरा में महाकाली की पूजा होती है। जहां भी बाबा गोरखनाथ का मंदिर है, वहां महाकाली की पूजा होती है। शिव और शक्ति का समन्वय ही जीवन का रहस्य है। सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस बल केवल देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया का सबसे बड़ा पुलिस बल है। राजनीतिक कारणों से पीएसी की कुछ कंपनियों को समाप्त कर दिया गया था। हर वाहिनी और पुलिस लाइन में एक स्मारक होना चाहिए ताकि उनकी गाथा और इतिहास आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचे। पूर्व सीडीएस जनरल विपिन रावत और सीडीएस जनरल अनिल चौहान गोरखा रेजिमेंट से जुड़े रहे हैं। कैप्टन मनोज पांडे भी इसी से जुड़े थे और लखनऊ में सैनिक स्कूल का नाम उन्हीं के नाम पर रखा गया है।
यूपी पुलिस में 20 प्रतिशत सीटें अग्निवीरों के लिए आरक्षित
सीएम ने कहा कि 2017 में सरकार बनने के बाद यह सुनिश्चित किया गया कि यदि सेना या पुलिस का जवान देश की सुरक्षा में शहीद होता है तो सरकार उसके परिवार को 50 लाख रुपये की सहायता और एक सदस्य को सरकारी नौकरी देती है। गांव में स्मारक बनाने का भी कार्य किया जाता है। यूपी पुलिस में 20 प्रतिशत सीटें अग्निवीरों के लिए आरक्षित रहेंगी।
सिविल-मिलिट्री फ्यूजन का प्रतीक बनेगा यह स्मारक : सीडीएस
कार्यक्रम में सीडीएस जनरल अनिल चौहान ने गोरखा सैनिकों की वीरता को सलाम किया। उन्होंने कहा कि 1886 में कुनराघाट में गोरखा रिक्रूटिंग डिपो की स्थापना हुई थी। प्रथम विश्व युद्ध में गोरखा सैनिकों ने अदम्य साहस दिखाया और कम से कम 20 हजार शहीद हुए। 1925 में इस युद्ध स्मारक की स्थापना हुई। आज इसका नवीनीकरण हमारी दूरदर्शिता का प्रमाण है। सीडीएस चौहान ने योगी सरकार को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह स्मारक सिविल-मिलिट्री फ्यूजन का प्रतीक बनेगा। सीडीएस ने कहा कि आज परिवर्तन का समय है। हम विकसित भारत की कल्पना करते हैं लेकिन अतीत को भूलना नहीं चाहिए। गोरखा सैनिकों का बलिदान हमारे लिए प्रेरणास्रोत है जो आने वाली पीढ़ी को प्रेरित करेगा।
पूरे पूर्वांचल के लिए महत्वपूर्ण है यह परियोजना : कमलेश पासवान
केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्यमंत्री कमलेश पासवान ने कहा कि इतिहास साक्षी है कि गोरखा सैनिकों ने अपने साहस और बलिदान से यह सिद्ध किया है कि देश की रक्षा कैसे की जाती है। यह हम सबके लिए प्रेरणा का स्रोत है। यह परियोजना पूरे पूर्वांचल के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करेगी। यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं है बल्कि वीर जवानों के प्रति श्रद्धांजलि है। इस स्मारक से पर्यटन क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलेगा और लोग दूर-दूर से इसे देखने आएंगे।
गोरखा रेजिमेंट से कांपते थे दुश्मन : रविकिशन
सदर सांसद रविकिशन शुक्ल ने कहा कि एक ऐसा नारा है जिसे सुनकर पाकिस्तान की फौज या कोई भी दुश्मन कांप उठता है। वह नारा है- “जय महाकाली, आयो गोरखाली।” दुश्मन देश पर नजर डालने की हिम्मत नहीं कर सकता। यहां गोरखा सैनिकों की याद में इतना सुंदर स्मारक बनाया जा रहा है। जब हम फिल्में बनाते हैं तो गोरखा रेजिमेंट और उनकी कहानियां हमें गहराई से प्रभावित करती हैं।
इस दौरान गोरखा बिग्रेड के अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल संजीव चौहान, मेयर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, एमएलसी डॉ. धर्मेंद्र सिंह, विधायक विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, राजेश त्रिपाठी, डॉ. विमलेश पासवान, प्रदीप शुक्ल, सरवन निषाद, गोरखा ब्रिगेड के पूर्व प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एके सिंह सहित गोरखा रेजिमेंट, जीआरडी व सेना के कई अधिकारी मौजूद रहे।
वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ संग्रहालय का भूमिपूजन व शिलान्यास
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संग्रहालय का भूमिपूजन किया और परिसर में स्थित मां काली मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस दौरान गोरखा रिक्रूटिंग डिपो (जीआरडी) की कार्यशैली पर आधारित एक लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया जिसमें गोरखा रेजिमेंट के बहादुर जवानों की कहानियां जीवंत रूप से प्रस्तुत की गईं। मुख्यमंत्री ने गोरखा रेजीमेंट के शहीदों के परिवारों की वीर महिलाओं को सम्मानित किया।
संग्रहालय में यह होगा खास
यह संग्रहालय गोरखा रेजिमेंट की गौरवगाथा को डिजिटल रूप से प्रस्तुत करेगा। इसमें डिजिटल और साउंड एंड लाइट शो के माध्यम से वीर जवानों की कहानियां जीवंत होंगी। 7डी थिएटर, दीवारों पर म्यूरल पेंटिंग और वीडियो डॉक्यूमेंट्री आकर्षण का केंद्र होंगे। स्मारक के सुंदरीकरण और संग्रहालय के निर्माण पर 44 करोड़ 73 लाख 37 हजार रुपये की लागत आएगी।