नेपाल के गोरखा युवाओं पर चीन की निगाहें
एनजीओ को मदद कर जानना चाहता है कि गोरखा युवा भारतीय सेना में क्यों शामिल होते हैं
संजय कुमार पांडेय
महराजगंज। भारतीय सेना की शान कहे जाने वाले गोरखा सैनिकों पर चीन की नजर है। इन सैनिकों की बहादुरी से चीन प्रभावित है। इसी को देखते हुए चीन नेपाल के एक एनजीओ की मार्फत यह जानने का प्रयास कर रहा है कि आखिर भारत के प्रति उनके लगाव की वजह क्या है और वह भारतीय सेना में क्यों शामिल होते हैं।
नेपाल के सूत्रों के अनुसार, इस कार्य के लिए नेपाल स्थित चीन के दूतावास से जुड़े एक अधिकारी ने नेपाल के एक एनजीओ को 12 लाख रुपये से अधिक की सहायता मुहैया कराई है। एनजीओ गोरखा युवाओं के बीच सर्वे कर यह जानकारी एकत्रित कर रहा है कि युवा भारत के बारे में क्या सोचते हैं। उनकी पसंद भारतीय गोरखा रेजीमेंट क्यों है। इसके अलावा एनजीओ युवाओं से अन्य जरूरी जानकारियां भी जुटा रहा है।
वहीं दूसरी तरफ नेपाल के बुटवल, पाल्पा, पोखरा समेत अन्य स्थानों पर निवास करने वाले गोरखा युवाओं की पहली पसंद भारतीय गोरखा रेजीमेंट है। वह अपने पूर्वजों की तरह भारतीय गोरखा रेजीमेंट में शामिल होने का सपना संजोए हैं। भूतपूर्व सैनिक एवं प्रहरी कल्याण महासंघ बुटवल, नेपाल के सचिव गगन गुरुंग ने कहा कि नेपाली गोरखा युवा भारत और नेपाल दोनों देशों को अपना मानते हैं। एक जन्म भूमि है तो दूसरा कर्म भूमि है। भारत ने हमें सब कुछ दिया है। तीसरे देश का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। देश में कुछ लोग हैं, जो भारत विरोधी मुहिम चला कर नफरत पैदा करना चाहते हैं। वे सफल नहीं होंगे।
क्या कहते हैं नेपाल के गोरखा युवा
पाल्पा निवासी पदम गुरुंग ने बताया कि भारतीय गोरखा रेजीमेंट में भर्ती होने के लिए बचपन से तैयारी कर रहा हूं। हमारे पूर्वजों ने भारतीय सेना में सेवा दी है। अन्य कहीं जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता। फुलवरिया बुटवल के राहुल झेत्री ने बताया कि गोरखा रेजीमेंट में भर्ती होना हम लोगों का सपना है। जब तक उम्र रहती है। भर्ती प्रकिया में जरूर हिस्सा लेते हैं। सफल नहीं होने के स्थिति में फिर कोई दूसरा काम करने की सोचते हैं।
गोपाल लिम्बुस ने बताया कि हमारी पांचवीं पीढ़ी भारतीय गोरखा रेजीमेंट में है। मैं भी भर्ती होने की तैयारी कर रहा हूं। भारत नेपाल में भाषा, सांस्कृतिक, सामाजिक संबंध है। पोखरा के रहने वाले अर्जुन गुरुंग ने बताया कि भारतीय गोरखा आर्मी की तैयारी पूरी हो चुकी है। मेरे पिता और बाबा भी गोरखा रेजीमेंट में सूबेदार थे। उनके पद चिह्नों का अनुसरण करते हुए आगे बढ़ना है।
यहां होती है तैयारी
पाल्पा, दांग, गोरखा, लिंबु, जूमला, तानसेन, काठमांडू, पोखरा सहित अन्य स्थानों पर करीब 50 सेंटर बने हैं। जहां भारतीय गोरखा रेजीमेंट में भर्ती होने के लिए युवाओं को तैयारी कराई जाती है।
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भारतीय सेना में सात गोरखा रेजीमेंट
भारतीय सेना में कुल सात गोरखा रेजीमेंट हैं। इनकी 39 बटालियन हैं। इनमें 28,000 नेपाली नागरिक शामिल हैं। आजादी से पहले भारतीय सेना में कुल 11 गोरखा रेजीमेंट थीं। जिनमें से चार आजादी के बाद ब्रिटिश सेना में चली गईं। अब भारत के पास पहली, तीसरी, चौथी, पांचवी, आठवीं, नौंवी और ग्यारवीं गोरखा रेजिमेंट है और ब्रिटिश सेना के पास दूसरी, छठी, सातवीं और दसवीं गोरखा रेजिमेंट है।
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