गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की गुरु गोरक्षनाथ शोधपीठ नाथपंथ का इतिहास जुटाएगी। नाथपंथ देश-विदेश तक फैला है, लेकिन इसकी लोकप्रियता अभी उतनी नहीं है। बहुत जगहों पर इसकी मान्यताएं और इतिहास अलग-अलग हैं।
आम लोगों तक इसकी मान्यताओं और इतिहास की जानकारी पहुंचाने के लिए शोधपीठ में नाथपंथ का विश्वकोश तैयार किया जा रहा है। इसकी समृद्धि के लिए शोधार्थी ऐसे मठ-मंदिरों में जाएंगे और वहां के स्थानीय लोगों से संपर्क साधकर नाथपंथ से जुड़ा स्थानीय इतिहास जुटाएंगे। इस काम के लिए शोधपीठ ऐसे स्थानीय विशेषज्ञों की सूची तैयार कर रहा है, जिनकी मदद से सुदूर क्षेत्र में मौजूद नाथपंथ के मठों और मंदिरों की जानकारी जुटाना आसान हो सकेगा।
हाल ही में कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने नाथपंथ विश्वकोश के निर्माण के लिए बैठक बुलाई और योजना के क्रियान्वयन की रूपरेखा तैयार कराई। बैठक में यह भी तय किया कि विश्वकोश के निर्माण के लिए सलाहकार समिति बनाई जाएगी। शोधपीठ के उपनिदेशक डॉ. कुशलनाथ मिश्र ने बताया कि नाथपंथ के विश्वकोश की मूल प्रति हिंदी भाषा में तैयार की जाएगी। बाद में प्रसार व मांग के मुताबिक इसका अन्य भाषाओं में अनुवाद कराया जाएगा।