खपत बढ़ी तो मुर्गे का भाव 320 रुपये किलो पहुंच गया, 10 दिनों में अब 100 रुपये कीमत हुई कम
रोजाना 40 से 50 टन मुर्गे की खपत, लगन में डेढ़ गुना ज्यादा बिका
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। गर्मी में गोरखपुरियों ने जमकर मुर्गा खाया है। लगन में खपत इतनी ज्यादा बढ़ गई कि मुर्गे लगभग खत्म हो गए। चिकन की कीमत 320 रुपये किलो तक पहुंच गया। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ से मुर्गे लाए गए तब जाकर कीमत काबू में आई। 10 दिन में चिकन का भाव 100 रुपये किलो तक कम हो गया है। अब फिर दुकानों पर चिकन के शौकीनों की भीड़ बढ़ गई है।
मुर्गे से जुड़े कारोबारियों के मुताबिक, यहां रोजाना 40 से 50 टन मुर्गे की खपत है। अप्रैल के लगन में खपत डेढ़ गुना बढ़ गई और पोल्ट्री फार्म में मुर्गे बहुत कम बचे। ऐसे मुर्गे का भाव टाइट हो गया। 10 दिन पहले तक चिकन 300 से 320 रुपये किलो तक पहुंच गया। फिर कारोबारियों ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ से मुर्गा मंगाना शुरू किया। उधर, इस बीच स्थानीय पोल्ट्री फार्मों में भी मुर्गे तैयार हो गए। लिहाजा दाम में तेजी से गिरावट दर्ज की गई। रविवार को 200-210 रुपये किलो चिकन बिका।
शास्त्री चौक पर मुर्गे की दुकान के संचालक संग्राम सिंह ने बताया कि गोरखपुर में 22 डीलर हैं। हर दिन 40-50 टन मुर्गे की खपत होती है। 5000 पोल्ट्री फार्म हैं, इसके बावजूद भी मुर्गे बहुत कम बचे थे। वहीं पास के दुकानदार जुनैद अहमद ने बताया कि लगन तेज थी इसलिए मुर्गे का भाव बढ़ गया था। एक सप्ताह तक भाव अधिक था, उसके बाद कम हो रहा है। व्यापारी महेंद्र साहनी ने बताया कि पांच दिन में थोक बाजार में खड़े मुर्गे की खपत में 45 रुपये किलो गिरावट आई है।
बेलीपार क्षेत्र के कालाबाग रोड के पास मुर्गे का व्यवसाय करने वाले प्रदीप साहनी ने बताया कि लगन में अधिक मुर्गे बिक गए। मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ से आए मुर्गे के कारण भाव कम रहा है।