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एमओयू पर हस्ताक्षर: अब आपदा से सचेत कर प्रबंधन की बारीकियां सिखाएगा गोरखपुर विश्वविद्यालय

Mon, 14 Jun 2021 06:57 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

विवि और राज्य आपदा प्राधिकरण के बीच एमओयू पर हुआ हस्ताक्षर, प्राधिकारण को सेंटर खोलने में हर संभव मदद करेगा विश्वविद्यालय: कुलपति
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DDU Gorakhpur - फोटो : अमर उजाला
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दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों को न सिर्फ आपदा से सचेत करने बल्कि आपदा प्रबंधन की बारीकियां भी सिखाएगा। इसके लिए विवि आपदा प्रबंधन पर कोर्स भी शुरू करने जा रहा है। वहीं सोमवार को विश्वविद्यालय और उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्राधिकरण के बीच प्रशासनिक भवन के कमेटी हाल में समझौता हुआ। आपदा प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल रविंद प्रताप शाही और कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग पर हस्ताक्षर किया।

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कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने प्रधानमंत्री के डिजास्टर रिस्क मैनेजमेंट पर कार्य करने के लिए 10 बिंदु निर्धारित किए हैं। इनमें बिंदु नंबर 6 विश्वविद्यालयों में डिजास्टर मैनेजमेंट को करिकुलम और गतिविधियों के आयोजन पर फोकस करता है। राज्य में आपदा से लोगों की जान और माल की सुरक्षा में यह करार मील का पत्थर साबित होगा। कहा कि विवि प्रदेश के ऐसे विश्वविद्यालय में शुमार है जो आपदा प्रबंधन पर कोर्स का संचालन कर रहा है।

इसके साथ ही नई शिक्षा नीति के तहत आपदा प्रबंधन पर डिग्री और डिप्लोमा कोर्स बनाया जा रहा है। राज्यपाल के निर्देश पर विवि में डिजास्टर मैनेजमेंट सेल का गठन किया गया है। इसमें रोवर्स रेंजर्स, एनसीसी और एनएसएस के को-ऑर्डिनेटर को जोड़ा गया है। कुलपति ने कहा कि प्राधिकरण रीजनल सेंटर या कोई केंद्र खोलना चाहता है, उसमें भी हर संभव मदद की जाएगी। साथ ही आपदा प्रबंधन पर कार्य करने के लिए सरकार से फंड मिल सके इस बाबत प्रस्ताव भेजा जाएगा।
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उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेपिफटेनेंट जनरल रविंद्र प्रताप शाही ने कहा कि डिजास्टर मैनेजमेंट की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जी-7 समिट में दुनिया के प्रभावशाली देश इसके लिए ठोस योजना बनाने पर मंथन कर रहे हैं। डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005 की स्थापना के बाद उड़ीसा और केरल ने बेहतर कार्य किया है जिससे आने वाली बाढ़ या तूफान से लाखों लोगों की जिंदगियां बचाई गई हैं।

दोनों ही राज्यों ने आपदा से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हमें इनसे सीख लेनी होगी। उत्तर प्रदेश में पिछले वर्ष 2800 लोगों ने बिजली गिरने, बाढ़ समेत अन्य आपदाओं से जान गंवाई है। प्रधानमंत्री एव मुख्यमंत्री इसे लेकर गंभीर हैं। ऐसे में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका बढ़ जाती है। प्राइमरी स्कूल से लेकर पीएचडी करने वाले विद्यार्थियों को आपदा प्रबंधन का गुर सिखाया जाना समय की मांग हैं।  

एमएमएमयूटी के कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने कहा कि हमारे यहां आग लगने पर कुआं खोदने की रवायत रही है। अब इसे बदलने की जरूरत है। आपदा किसी भी तरह की हो सकती है। पूर्वांनुमान लगाए जाने से जान और माल की सुरक्षा हो सकेगी। प्रो. पांडेय ने कहा कि एमएमएमयूटी ने पांच गांव को गोद लिया है। एक गांव को आईओटी की मदद से विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। वर्ष 2021-22 का जो कोर्स रिवाइज किया है उसमें एनसीसी को इलेक्टिव कोर्स के रूप मंजूरी दी है। जो अपने आप में आपदा के 40 फीसदी सिलेबस को कवर करता है। संचालन डिजास्टर मैनेजमेंट सेल के समन्वयक प्रो हर्ष कुमार सिन्हा ने किया।

इस दौरान ब्रिगेडियर पीके सिंह, भूगोलवेत्ता डॉ. कासिफ, एडीएम फाइनेंस राजेश सिंह, गौतम गुप्ता, प्रो. गोविंद पांडेय, प्रो. केजी उपाध्याय, प्रो. अजय सिंह, प्रो. सतीश चंद पांडेय, प्रो. विनय सिंह, प्रो. एनपी भोक्ता, संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष और एनएसएस, रोवर्स रेंजर और एनसीसी के को-ऑर्डिनेटर आदि मौजूद रहे।
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