उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्राधिकरण के उपाध्यक्ष लेपिफटेनेंट जनरल रविंद्र प्रताप शाही ने कहा कि डिजास्टर मैनेजमेंट की अहमियत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जी-7 समिट में दुनिया के प्रभावशाली देश इसके लिए ठोस योजना बनाने पर मंथन कर रहे हैं। डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005 की स्थापना के बाद उड़ीसा और केरल ने बेहतर कार्य किया है जिससे आने वाली बाढ़ या तूफान से लाखों लोगों की जिंदगियां बचाई गई हैं।
दोनों ही राज्यों ने आपदा से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हमें इनसे सीख लेनी होगी। उत्तर प्रदेश में पिछले वर्ष 2800 लोगों ने बिजली गिरने, बाढ़ समेत अन्य आपदाओं से जान गंवाई है। प्रधानमंत्री एव मुख्यमंत्री इसे लेकर गंभीर हैं। ऐसे में शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका बढ़ जाती है। प्राइमरी स्कूल से लेकर पीएचडी करने वाले विद्यार्थियों को आपदा प्रबंधन का गुर सिखाया जाना समय की मांग हैं।
एमएमएमयूटी के कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने कहा कि हमारे यहां आग लगने पर कुआं खोदने की रवायत रही है। अब इसे बदलने की जरूरत है। आपदा किसी भी तरह की हो सकती है। पूर्वांनुमान लगाए जाने से जान और माल की सुरक्षा हो सकेगी। प्रो. पांडेय ने कहा कि एमएमएमयूटी ने पांच गांव को गोद लिया है। एक गांव को आईओटी की मदद से विकसित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। वर्ष 2021-22 का जो कोर्स रिवाइज किया है उसमें एनसीसी को इलेक्टिव कोर्स के रूप मंजूरी दी है। जो अपने आप में आपदा के 40 फीसदी सिलेबस को कवर करता है। संचालन डिजास्टर मैनेजमेंट सेल के समन्वयक प्रो हर्ष कुमार सिन्हा ने किया।
इस दौरान ब्रिगेडियर पीके सिंह, भूगोलवेत्ता डॉ. कासिफ, एडीएम फाइनेंस राजेश सिंह, गौतम गुप्ता, प्रो. गोविंद पांडेय, प्रो. केजी उपाध्याय, प्रो. अजय सिंह, प्रो. सतीश चंद पांडेय, प्रो. विनय सिंह, प्रो. एनपी भोक्ता, संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष और एनएसएस, रोवर्स रेंजर और एनसीसी के को-ऑर्डिनेटर आदि मौजूद रहे।