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गोरखपुर विश्वविद्यालय : साहित्यिक चोरी की जांच में विभागीय कमेटी के गठन पर पेच

Tue, 01 Sep 2026 02:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
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- कॉमर्स विभाग के अध्यक्ष पर आरोप, नई कमेटी या संस्थागत समिति से जांच कराने पर मंथन
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संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कॉमर्स विभाग में साहित्यिक चोरी के आरोप की जांच अब कमेटी के गठन को लेकर उलझ गई है। विभागीय स्तर पर गठित होने वाली कमेटी में विभागाध्यक्ष की भूमिका रहती है लेकिन इस मामले में आरोप विभागाध्यक्ष पर ही हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन अब नई विभागीय कमेटी गठित करने अथवा सीधे संस्थागत कमेटी से जांच कराने के विकल्प पर मंथन कर रहा है। विभागीय कमेटी में विभागाध्यक्ष, उसी विभाग के कुलपति की ओर से नामित एक वरिष्ठ शिक्षक और एक बाहरी सदस्य होते हैं।
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वहीं, विश्वविद्यालय की संस्थागत कमेटी में बाहरी और आंतरिक मिलाकर चार सदस्य होते हैं। संस्थागत कमेटी में कुलपति की ओर से नामित प्रो. शांतनु रस्तोगी, लाइब्रेरियन डॉ. बिभाष मिश्र, नॉर्थ ईस्टर्न यूनिवर्सिटी, शिलांग के पूर्व कुलपति प्रो. रमेश शर्मा और लखनऊ विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग के डॉ. अमृतांशु शुक्ला शामिल हैं। अब निगाह इस पर है कि कॉमर्स विभाग के मामले की जांच किस कमेटी से कराई जाती है।
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साहित्यिक चोरी के मामले में यूजीसी के नियमों में कड़े प्रावधान
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों के अनुसार साहित्यिक चोरी के मामले में 10 से 40 फीसदी समानता मिलने पर पांडुलिपि वापस की जाती है। 40 से 60 फीसदी समानता पर पांडुलिपि लौटाने के साथ एक वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने और दो वर्ष तक सुपरवाइजर बनने पर रोक का प्रावधान है। 60 फीसदी से अधिक समानता पर दो वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने और तीन वर्ष तक सुपरवाइजर नहीं बनने का प्रावधान है। मामले की पुनरावृत्ति होने पर निलंबन, सेवा समाप्ति समेत अनुशासनात्मक कार्रवाई भी संभव है।
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कार्य परिषद तय करेगी प्रो. आरपी सिंह की वरिष्ठता
साहित्यिक चोरी के आरोप का सामना कर रहे प्रो. आरपी सिंह की वरिष्ठता अब कार्य परिषद में तय होगी। राज्यपाल कार्यालय की ओर से जुलाई माह में विश्वविद्यालय प्रशासन को एक माह में निर्णय लेने को कहा गया था। निर्धारित अवधि बीतने के बाद जब कार्रवाई शुरू नहीं हुई तो प्रो. सिंह ने राज्यपाल के निर्देश का हवाला देते हुए कुलसचिव को पत्र देकर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है। इस प्रकरण को लेकर राज्यपाल के निर्देश पर गोरखपुर विश्वविद्यालय के शिक्षकों की अंतिम वरिष्ठता सूची भी निरस्त कर दी गई है।
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वर्जन
साहित्यिक चोरी के मामले की जांच विभागीय और संस्थागत समितियों की ओर से की जाती है। यूजीसी के नियमानुसार समितियां ही निर्णय लेंगी। रिपोर्ट कार्रवाई के लिए कार्यपरिषद की बैठक में रखा जाएगा। कॉमर्स विभाग के डीन और हेड प्रो. आरपी सिंह की वरिष्ठता तय करने को लेकर राज्यपाल कार्यालय से निर्देश मिला है। निर्णय के लिए इस मामले को कार्य परिषद में रखा जाएगा।
- प्रो. पूनम टंडन, कुलपति
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