दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय में आउटसोर्सिंग पर कार्यरत 295 कर्मचारियों का नया साल फीका रहेगा। उन्हें दो महीने से वेतन नहीं मिला है। तीसरा महीना भी पूरा होने वाला है। ज्यादातर कर्मचारी उधार लेकर किसी तरह परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं।
विश्वविद्यालय में आउटसोर्सिंग पर कुशल और अकुशल दोनों तरह के कर्मचारी नियुक्त हैं। इन्हें एक फर्म की ओर से तैनात किया गया है। कुशल कर्मचारी को 10,500 रुपये और अकुशल कर्मचारी को 7,500 रुपये महीने मिलते हैं। कुलपति प्रो. राजेश सिंह ने कार्यभार ग्रहण करने के बाद मॉनीटरिंग में गड़बड़ी पाई तो उन्होंने व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए एक ऑउटसोर्सिंग मॉनीटरिंग कमेटी बना दी।
कमेटी ने सिस्टम को दुरुस्त करते हुए कई बदलाव किए। मसलन, कर्मचारी जहां भी तैनात हैं वहां के विभागाध्यक्ष या प्रभारी की ओर से उपस्थिति की प्रमाणित प्रति देना अनिवार्य है, ताकि बिना ड्यूटी कराए फर्म ज्यादा भुगतान न करा ले। हालांकि यह प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी कर्मचारियों का वेतन लटक गया है।