दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के विधि विभाग की पूर्व छात्रा द्वारा सोशल मीडिया में लगाए गए यौन शोषण के मामले को विश्वविद्यालय प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। विभागाध्यक्ष एवं डीन प्रो. नसीम अहमद की ओर से मामले की जांच कराने के लिए कुलसचिव को तहरीर दी गई है।
देर रात तक मुकदमा दर्ज नहीं हुआ है। वहीं, कुलपति के निर्देश पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने यौन उत्पीड़न समिति को जांच सौंप दी है। पूरे मामले पर समिति तीन दिन में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
विश्वविद्यालय में एलएलबी की एक पूर्व छात्रा ने अपनी फेसबुक वाल पर पोस्ट लिखकर विधि विभाग के तीन शिक्षकों पर शारीरिक शोषण जैसे गंभीर आराेप लगाए हैं। आरोप यह भी है कि विभाग में छात्राओं का शारीरिक शोषण करने वाला एक रैकेट सक्रिय है। दो दिनों तक आरोप का सिलसिला चला है और जिन शिक्षकों पर आरोप लगाए गए हैं उनकी खामोशी से तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं।
मंगलवार को विश्वविद्यालय में हड़कंप मच गया। विधि विभाग के डीन एवं विभागाध्यक्ष प्रो. नसीम अहमद ने अपराह्न चार बजे विभाग में ही शिक्षकोंं की बैठक बुलाई। जिसमें मामले की जांच और उचित कार्रवाई का प्रस्ताव लाया गया। जिसके बाद प्रो. अहमद ने कुलसचिव को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की।
उधर, विश्वविद्यालय के मीडिया एवं जनसंपर्क प्रभारी ने बताया कि विवि प्रशासन ने यूजीसी गाइडलाइंस के अंतर्गत गठित विश्वविद्यालय की यौन उत्पीड़न समिति को जांच सौंप दी है। समिति पूरे मामले पर अपनी रिपोर्ट तीन दिन में सौंपेगी, जिसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।