आने वाले समय में मोबाइल फोन को रुमाल की तरह मोड़ कर जेब में रख सकेंगे। इस दौरान मोबाइल की स्क्रीन भी नहीं टूटेगी। जरूरत पड़ी तो उसका आकार भी बड़ा किया जा सकेगा। इस पर रिसर्च एडवांस स्टेज पर है। यह बातें सीएसआईआर भोपाल के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. मनोज गुप्ता ने कहीं।
वह शनिवार को दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालयय के फिजिक्स विभाग की ओर से आयोजित फ्यूचरिस्टिक मैटेरियल पर आयोजित सेमिनार के दूसरे दिन बोल रहे थे। इलेक्ट्रिक नैनो मैटेरियल्स आधारित नैनोजेनरेटर्स के बारे में उन्होंने बताया कि मोबाइल फोन का आकार छोटा करने में बैट्री सबसे बड़ी बाधा थी। इसे दूर कर लिया गया है।
पीजो नैनोमैटेरियल आकार में छोटे, मुड़ने वाले और पारदर्शी होते हैं। आईआईटी कानपुर के प्रो. अंजन गुप्ता ने ग्रेफीन में सिलिकॉन की असंगतता पर जानकारी दी। कहा कि सिलिकॉन को लेकर कई प्रयोग किए गए। यह सफल रहे हैं। सिलिकॉन पार्टिकल से मोबाइल की बैटरी का आकार और छोटा हो जाएगा। आने वाले दिनों में छोटे आकार की बैटरी से लंबे समय तक फोन चलेंगे।
विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग के डॉ. सचिन कुमार सिंह ने द्रव क्रिस्टल पदार्थों पर चर्चा की। बताया कि एलईडी स्क्रीन से आंखों पर दबाव अधिक पड़ रहा है। इस खामी को लिक्विड क्रिस्टल मैटेरियल से दूर किया जा सकता। यह आंखों पर दुष्प्रभाव नहीं डालेंगे। दक्षिण कोरिया की प्रो. सादिया अमीन ने ड्राई डिग्रेडेशन एवं ट्रेस मेटल आयन डिटेक्शन पर, शारदा विश्वविद्यालय के प्रो. पीके सिंह ने नैनो पदार्थों एवं सोलर सेल पर व्याख्यान प्रस्तुत किया।
चेक गणराज्य के भौतिक विज्ञानी प्रो. कुमुदबंधु मिश्र ने फोटो सिंथेसिस, सऊदी अरब के प्रो. एसए सिद्दीकी का मोलेक्युलर डायोड, लखनऊ विश्वविद्यालय के डॉ. अनार सिंह का हेटेरोस्ट्रक्चर्स तथा एनआईटी पटना के डॉ. डीके महतो ने पराऑक्साइड पर चर्चा की। विशेष सत्र में बायोविया के डॉ. आर कावाथेकर ने मैटेरियल्स स्टूडियो द्वारा कंप्यूटेशनल मैटेरियल्स साइंस पर जानकारी साझा की।
इसकी अध्यक्षता लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो. नीरज मिश्र ने की। विभिन्न सत्रों में प्रो. रविशंकर सिंह, प्रो. दिनेश यादव, प्रो. उमेश यादव, प्रो. राकेश तिवारी, प्रो. वीके पांडेय, प्रो. शरद मिश्र, प्रो. सुग्रीव नाथ तिवारी, प्रो. शांतनु रस्तोगी और डॉ. अंबरीश श्रीवास्तव मौजूद रहे।