नई शिक्षा नीति का प्रभावी क्रियान्वयन कराएंगे नए कुलपति
गोरखपुर। दीन दयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर के नए कुलपति प्रो. राजेश सिंह जल्द ही कार्यभार संभाल लेंगे। कुलपति ने प्राथमिकताएं भी तय कर ली हैं। उनका कहना है कि नई शिक्षा नीति का क्रियान्वयन प्रभावी तरीके से कराया जाएगा। अब ऑफलाइन के साथ ही ऑनलाइन शिक्षा की अनिवार्य व्यवस्था बनाई जाएगी। इसके लिए शिक्षक व विद्यार्थियों को पूरी तरह तैयार रहना होगा। कोविड-19 ने शिक्षा व्यवस्था में बदलाव के लिए बाध्य किया है। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने प्रो. राजेश सिंह को गोरखपुर विश्वविद्यालय का नया कुलपति बनाया है। उनका कार्यकाल तीन वर्षों का होगा।
कुलपति प्रो. राजेश सिंह मूल रूप से जौनपुर के केराकत तहसील क्षेत्र के उमरी गांव के रहने वाले हैं। उनकी पढ़ाई-लिखाई हरियाणा से हुई है। वह 1991 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) से जुड़े और 2005 में प्रोफेसर बनाए गए। बायोटेक्नोलॉजी की अच्छी जानकारी रखने वाले प्रो. राजेश लंबे समय तक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) में रहे हैं। एग्रीकल्चर व रिसर्च पर अच्छा काम किया है। वह पूर्णिया यूनिवर्सिटी बिहार के साथ ही दो और विश्वविद्यालयों के प्रभारी कुलपति हैं। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय और संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति की जिम्मेदारी भी संभाल रहे हैं। अब गोरखपुर विश्वविद्यालय का कुलपति बनाया गया है। अमर उजाला संवाददाता से मोबाइल फोन पर कुलपति ने बात की और कहा कि गोरखपुर विश्वविद्यालय का कुलपति बनना सम्मान की बात है। विश्वविद्यालय की प्रतिष्ठा देश, दुनिया में है। बीएचयू, आईसीएआर, पूर्णिया सहित अन्य विश्वविद्यालयों में काम करने का लंबा अनुभव है। इसका फायदा विश्वविद्यालय और संबद्ध महाविद्यालयों के विद्यार्थियों को जरूर मिलेगा। कुलपति ने कहा कि वह जल्द ही गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलपति का कार्यभार संभाल लेंगे।