गोविवि : प्री-पीएचडी के विद्यार्थियों की होगी परीक्षा
गोरखपुर। गोरखपुर एवं संबद्ध महाविद्यालयों में प्री-पीएचडी के विद्यार्थियों को प्रोन्नत नहीं किया जाएगा। विश्वविद्यालय प्रशासन अब परीक्षा कराने की तैयारी में है। हालांकि, छात्रनेताओं ने इस मामले को लेकर आंदोलन करने की तैयारी शुरू कर दी है। सोमवार को छात्रनेता मनीष ओझा के नेेतृत्व में छात्र कुलपति से मिलकर ज्ञापन देंगे।
दरअसल, छह वर्ष बाद पिछले साल पीएचडी के लिए परीक्षा हुई थी। इस परीक्षा में क्वालीफाई करने वाले करीब 1500 छात्रों का विभागों में रजिस्ट्रेशन हुआ। छह माह के लिए उन्हें कंप्यूटर व शोध पद्धति की जानकारी दी जानी थी। जिसके बाद क्वालीफाई टेस्ट देना है। टेस्ट में पिास हुए अभ्यर्थियों का ही शोध के लिए पंजीकरण होना है। यह टेस्ट कोरोना के चलते नहीं हो पाया है, जिसे लेकर छात्रों में निराशा है। उनका कहना है कि जितना विलंब होगा, पीएचडी पूरी करने में उतनी ही देरी होगी। छात्रों की मांग है कि उन्हें भी टेस्ट में प्रोन्नत किया जाए। हालांकि यूजीसी ने प्री-पीएचडी को लेकर कोई गाइडलाइन नहीं दी है। लिहाजा विश्वविद्यालय प्रशासन ने परीक्षा कराने की तैयारी शुरू कर दी है। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि ट्रेनिंग के बाद परीक्षा में उत्तीर्ण विद्यार्थी ही शोध के पात्र होंगे।
स्नातक, परास्नातक और प्री-पीएचडी की परीक्षा में काफी अंतर है। इसे विद्यार्थी समझ नहीं पा रहे हैं। स्नातक व परास्नातक की परीक्षा डिग्री के लिए है, जबकि प्री-पीएचडी में क्वालीफाइंग टेस्ट एक तरह स्क्रीनिंग का पार्ट है। इसलिए विद्यार्थी अपनी तैयारी करें। जैसे ही स्थिति सामान्य होगी, परीक्षा करा दी जाएगी।
- प्रो. वीके सिंह, कुलपति, गोरखपुर विश्वविद्यालय
शोधार्थियों का होगा अब ऑनलाइन वाइबा
गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय एवं संबद्ध महाविद्यालय के शोधार्थियों के लिए राहत वाली खबर है। कोराना संक्रमण को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने फाइनल वाइबा को ऑनलाइन कराने की अनुमति दे दी है। साथ ही थीसिस जमा करने के लिए छह माह की अवधि दी जाएगी।
दरअसल, कई शोधार्थी ऐसे हैं, जिनकी थीसिस जमा करने की अवधि पूरी हो गई है। कोरोना के चलते वाइबा भी नहीं हो पाया है। यूजीसी की गाइडलाइन के मुताबिक अब इन विद्यार्थियों को छह महीने का समय दिया जाएगा। साथ ही ऑनलाइन वाइबा भी होगा। कुलपति प्रो वीके सिंह ने बताया कि यूजीसी के नियमों का पालन किया जाएगा। शोधार्थियों का वाइबा ऑनलाइन होगा।