शिखा दुबे हत्याकांड में आठ अप्रैल को आखिरी गवाही होगी, केस में छह गवाहों की गवाही पूरी हो चुकी है। इंजीनियरिंग कॉलेज इलाके की शिखा और उसके प्रेमी दीपू पर पूजा की हत्या का आरोप है।
इंजीनियरिंग कॉलेज इलाके में चर्चित शिखा दुबे हत्याकांड का ट्रायल आखिरी दौर में चल रहा है। इस केस में छह गवाहों की गवाही हो चुकी है। अब केस के विवेचक सेवानिवृत अश्वनी कुमार सिन्हा की गवाही आठ अप्रैल को होनी है। यह गवाही आरोपियों को सजा दिलाने में अहम किरदार निभाएगी। तीन आरोपियों में शिखा दुबे, दीपू और सुग्रीव की निगाह इस पर टिकी है।
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कैंट थाने के पैरोकार के मुताबिक, सिविल कोर्ट में एडीजे- 02 में यह केस चल रहा है। वर्ष 2011 की इस घटना में 29 गवाह थे। केस की गंभीरता को देखते हुए 22 गवाहों को इस केस से हटा दिया गया। सात अहम गवाहों की गवाही शुरू कराई गई। इसमें छह की गवाही पूरी हो चुकी है।
जबकि आखिरी गवाह विवेचक अश्वनी कुमार सिन्हा लकवाग्रस्त होने की वजह से गवाही देने उपस्थित नहीं हो पाए। लकवा की वजह से उनको बोलने में परेशानी हो रही है। आठ अप्रैल को तारीख है, प्रयास किया जा रहा है कि किसी तरह उन्हें घर से ले आकर गवाही पूरी करा दी जाए।
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शिखा के पिता ने कहा- मेरी बेटी की नहीं हुई हत्या
इस केस में इंजीनियरिंग कॉलेज के कमलेशपुरम कॉलोनी निवासी शिखा दुबे के पिता रामप्रकाश दुबे की गवाही पूरी हो चुकी है। सूत्रों की मानें तो शिखा दुबे के पिता ने गवाही के दौरान कहा कि बेटी की गुमशुदगी कैंट थाने में दर्ज कराई थी। बाद में पता चला उसकी हत्या हो गई है। पुलिस ने जांच की तो पता चला कि शिखा जिंदा है, उनकी बेटी की हत्या नहीं हुई है।
शिखा के अधिवक्ता बोले
शिखा दुबे के अधिवक्ता बच्चू सिंह ने बताया कि केस ट्रॉयल में चल रहा है। सभी गवाहों की गवाही हो चुकी है। विवेचक की गवाही होनी बाकी है। इस केस में शिखा के खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। वह निर्दोष है। सुनवाई के बाद पक्ष में ही फैसला आने की पूरी उम्मीद है।
शिखा की नहीं पूजा की हुई थी हत्या
घटना 11 जून 2011 की है। सिंघड़िया में एक युवती का शव मिला था। उसकी कद-काठी और उम्र से पता चला कि वह इंजीनियरिंग कॉलेज के कमलेशपुरम कॉलोनी इलाके से लापता युवती शिखा दुबे है। उसके पिता को बुलाया गया। रिश्तेदार भी जुटे, सबने माना शव शिखा का ही है। इस दौरान पिता रामप्रकाश दुबे ने पड़ोसी दीपू पर हत्या की आशंका जताई और केस दर्ज करा दिया। साथ ही महिला के शव को ही बेटी समझ कर अंतिम संस्कार भी कर दिया। पुलिस जांच शुरू हुई तो पता चला कि दीपू भी घर से लापता है। छानबीन करने पर पुलिस को खबर मिली कि आरोपी दीपू, सोनभद्र में है। खोजते हुए पुलिस टीम सोनभद्र पहुंची तो वहां दीपू के साथ ही शिखा भी मिली। पुलिस दोनों को गिरफ्तार कर गोरखपुर लेकर आई। दोनों से पूछताछ में पता चला कि शव सोनभद्र की पूजा (25) का था।
तीन बच्चों की मां थी पूजा
पुलिस के मुताबिक, शिखा ने बताया कि उसे पड़ोसी दीपू यादव से प्यार हो गया था। दोनों को पता था कि उनके घरवाले इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं होंगे। ऐसे में दोनों ने घर से भागने और परिजनों से पीछा छुड़ाने के लिए एक खतरनाक साजिश रची। दोनों ने तय किया कि शिखा की कद-काठी की किसी महिला की हत्या कर उसे शिखा की पहचान दे दी जाए।
हत्या की इस साजिश में दीपू का दोस्त सुग्रीव भी शामिल था, जो एक ट्रांसपोर्ट कारोबारी था। उसका अक्सर सोनभद्र जाना होता था। वहां वह एक ऐसी लड़की को जानता था, जो कद-काठी में शिखा से बहुत मिलती थी। उसका नाम पूजा (25) था। पूजा तीन बच्चों की मां थी। दीपू और सुग्रीव उसे गोरखपुर में तीन हजार रुपये की नौकरी दिलाने के बहाने ले आए।
आरोप है कि सुग्रीव 10 जून 2011 की रात में पूजा को ट्रक से कुनराघाट लाया और उधर शिखा दीपू के साथ घर से भागकर कुसम्ही जंगल पहुंच गई। जंगल में ट्रक में सवार पूजा को शिखा ने वे कपड़े पहना दिए, जिन्हें पहनकर वह घर से निकली थी।
इतना ही नहीं, उसके गले में एक धागा डाला गया, जो शिखा हमेशा पहनती थी। इसके बाद ट्रक में ही पूजा की हत्या कर दी गई। पहचान छिपाने के लिए उसके चेहरा पर प्रहार कर उसे नष्ट कर दिया गया था।