गोरखपुर में वैज्ञानिक का बेटा कमरे में गुमसुम और अंधेरे में रहना चाहता है। वह अपनी गलती याद करके बार-बार रोने लगता है। बेटे के धकेलने से दो दिसंबर को वैज्ञानिक की पत्नी की मौत हो गई थी।
गोरखपुर के गुलरिहा के शिवपुर सहबाजगंज स्थित बाल सुधार गृह में वैज्ञानिक राम मिलन विश्वकर्मा का बेटा करवटें बदलकर रात गुजार रहा है। मां की मौत का जिम्मेदार बेटा गुमसुम रहता है। वह वहां अंधेरे में रहने की बातें भी कहता है।
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कर्मचारी उसकी लगातार निगरानी भी कर रहे हैं। इस घटना के बाद वह पूरी तरह से टूट गया है। कोई भी उससे बाल सुधार गृह आने की वजह पूछता है तो वह रोने लगता है। बार-बार बोलता है-मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई।
बाल सुधार गृह में 250 से अधिक बाल अपचारी विभिन्न अपराधों के आरोप में बंद हैं। सूत्रों के अनुसार, बाल अपचारियों से भी बहुत कम बातें करता है। उसने खाना-पीना भी कम कर दिया है। बार-बार अपनी गलती याद कर वह कोने में बैठकर रोने लगता है।
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बताया जा रहा है कि कुछ अपचारियों ने उसे हंसाने का प्रयास किया, लेकिन कामयाब नहीं हो पाए। अभी तक उसको गोरखपुर का स्कूल परेशान करता था। अब इतने अपचारियों के बीच वह घुटन महसूस कर रहा है।
खेलने के लिए मना कर दिया
सूत्रों के अनुसार, वैज्ञानिक के बेटे से कुछ अपचारियों ने साथ खेलने के लिए भी कहा, उसके सामने लूडो भी लाकर रखा, लेकिन उसने मना कर दिया। बताया जा रहा है कि वैज्ञानिक का बेटा बास्केटबॉल का अच्छा खिलाड़ी है। वह प्रत्येक दिन पिपराइच क्षेत्र में बास्केटबॉल खेलने जाता था। उसने कई टूर्नामेंट भी खेले हैं। जेल में उसकी काउंसिलिंग कराई जा रही है।
दो दिसंबर को हुई थी वैज्ञानिक की पत्नी की मौत
भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र चेन्नई के सहायक वैज्ञानिक राम मिलन की पत्नी आरती का शव दो दिसंबर को घर के अंदर पड़ा मिला था। जांच हुई तो वैज्ञानिक का बेटा ही इसमें आरोपी निकला।
अवसाद में है वैज्ञानिक का बेटा..उठा सकता है आत्मघाती कदम
किशोरावस्था में शारीरिक के साथ तेजी से मानसिक बदलाव भी होता है। कई हार्मोनल चेंज की वजह से शरीर में जो परिवर्तन होते हैं, इसे लेकर किशोर में अत्यधिक चिंता, तनाव और कभी- कभी गुस्सा भी होता है। अचानक ऐसी घटना को अंजाम दे बैठता है, जिसका पछतावा होने पर वह अवसाद में चला जाता है। पिपराइच और तमकुहीराज की घटनाएं अपने आप में दुर्लभ प्रकार की हैं।
वैज्ञानिक के बेटे को अभी क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट की जरूरत है, वरना वह कुंठाग्रस्त होता जाएगा और इलाज मुश्किल हो जाएगा। ऐसे लोग कभी भी आत्मघाती कदम उठा लेते हैं..। यह कहना है कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज में मानसिक रोग विभागाध्यक्ष डॉक्टर तापस कुमार आईच का। उन्होंने कहा कि पिपराइच में बेटे के धक्का देने से मां की हुई मौत के बाद सदमा, अपराध बोध व डर से किशोर गहरे अवसाद की चपेट में आ गया है।
किशोर कई बार गुस्से को नियंत्रित नहीं कर पाते हैं और खतरनाक कदम उठा लेते हैं। वैज्ञानिक का बेटा अचानक किसी वजह से अपने गुस्से पर नियंत्रण नहीं रख पाया होगा और घटना हो गई होगी। हालांकि इसे और अधिक तथ्यात्मक बनाने के लिए इस किशोर का मानसिक टेस्ट आवश्यक है।