रोड पर लगी दुकानें।
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दो साल से खाली है ठेले-खोमचे वालों के लिए बना शेड
फोरलेन बनने पर शुरुआत में गाड़ियां फर्राटा भरते हुए निकल जाती थीं मगर धीरे-धीरे ठेले-खोमचे और ऑटो वालों का कब्जा शुरू होने के साथ ही साथ फिर जाम की स्थिति बनने लगी। अब यह मार्ग सिक्स लेन बन रहा है मगर अभी भी स्थिति सुधरती नहीं नजर आ रही है।
इस रूट पर लगने वाले जाम की ही वजह से शासन-प्रशासन को यहां सिक्स लेन ओवरब्रिज का निर्माण शुरू कराना पड़ा है, जिस पर करीब 500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। तब तक जाम की समस्या कम करने और सुगम यातायात के लिए नगर निगम प्रशासन ने टीपीनगर से राजघाट तक नो वेंडिंग जोन घोषित कर दिया है। जल्द ही ठेले-खोमचे वालों को इस क्षेत्र से हटाने का काम शुरू हो जाएगा।
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टीपीनगर से राजघाट तक की सड़क नो वेंडिंग जोन घोषित करने के बाद, नगर निगम प्रशासन इसी सप्ताह यहां से ठेले-खोमचे वालों को हटाना शुरू कर देगा। इन्हें टीपीनगर पुलिस चौकी के पीछे बनाए गए शेड में शिफ्ट किया जाएगा।
गत सोमवार को नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने पथ विक्रय समिति के साथ बैठक की थी। इसमें रुस्तमपुर ढाला से ट्रांसपोर्ट नगर पुलिस चौकी तक सड़क किनारे ठेले-खोमचे लगाने वालों की वजह से ट्रैफिक जाम पर चर्चा हुई। तय हुआ कि अगले तीन से चार दिनों में ट्रांसपोर्ट नगर पुलिस चौकी से राजघाट पुल तक सड़क के किनारे ठेला लगाने वालों को ट्रांसपोर्ट नगर पुलिस चौकी के पीछे बनाए गए शेड में व्यवस्थित कर दिया जाएगा।
रुस्तमपुर ढाले के पास बनाए गए शेड 20 ठेले वालों के लिए आवंटित है, वहीं ट्रांसपोर्टनगर में कुल 240 दुकानदारों के लिए शेड बनाए गए हैं। इन्हें बनकर तैयार हुए और आवंटित हुए दो साल का समय हो गया मगर अभी तक सभी खाली हैं। पटरी व्यापारियों की दलील है कि शेड, मुख्य मार्ग से काफी भीतर की तरफ है। वहां शिफ्ट होने पर उनका व्यापार काफी प्रभावित होगा। कोई ग्राहक वहां पहुंचेगा ही नहीं।