शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान (चिड़ियाघर) में सात मई को बाघिन शक्ति की मौत हुई थी। इसके नमूने के आधार पर भोपाल से 12 मई को आई रिपोर्ट में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई थी। तब से ही प्राणि उद्यान दर्शकों के लिए बंद है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम ने आकर दूसरे वन्यजीवों के स्वास्थ्य की जांच की। उनके नमूने लिए और जांच के लिए भोपाल व बरेली भेजा।
23 मई को रिपोर्ट आने पर मैलानी, तेंदुआ के दो शावक, हिमालयन गिद्ध और काकाटेल पक्षी में भी संक्रमण मिला। आइसोलेट कर इनका इलाज किया गया। हालांकि, इसमें काकाटेल पक्षी की भी मौत हो गई। एक हफ्ते बाद दोबारा नमूना लेकर जांच के लिए भोपाल भेजा गया। इसमें संक्रमित समेत सभी वन्यजीवों की रिपोर्ट निगेटिव आई।
नियमानुसार एक बार और नमूना लेकर जांच के लिए भेजा गया। इस बार भोपाल से रिपोर्ट आने में देरी हुई, लेकिन यह निगेटिव थी। इसके बाद प्राणि उद्यान प्रशासन ने चिड़ियाघर को खोलने की अनुमति मांगी। विशेषज्ञों ने नियमों का हवाला देते हुए मना कर दिया और कहा कि 15 दिन के अंदर दो रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद ही खोलने की अनुमति मिलेगी।
इसके बाद शेरनी, गैंडे, हाथी और तेंदुए समेत 13 वन्यजीवों के सैंपल जांच के लिए भोपाल भेजे गए। इस बार आई रिपोर्ट नियमानुसार है। उम्मीद है कि चिड़ियाघर को खोलने की अनुमति मिल जाएगी। चिड़ियाघर के उपनिदेशक व मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डाॅ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि तीसरी रिपोर्ट भी निगेटिव आई है।
उच्चाधिकारियों को पत्र लिखकर अनुमति मांगी गई है। अनुमति मिलने पर छह जुलाई से दर्शकों के लिए खोल दिया जाएगा। चिड़ियाघर को दर्शकों के लिए पूरी तरह से तैयार कर दिया गया है।