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Gorakhpur News: चुनावी रंग में रंगने को बेताब 200 माफिया, बदमाश खुफिया रडार पर

Thu, 07 Mar 2024 05:38 PM IST
रोहित सिंह अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर

सार

कई अपराधियों के गुंडा, जिला बदर की फाइल तैयार हो रही है तो टॉप टेन बदमाशों पर एलआईयू और दूसरे खुफिया विभाग नजर रखे हैं। मकसद यही है कि इनकी वजह से लोकसभा चुनाव में कोई खलल न पड़ने पाए। पुलिस ने अपनी तरफ से पूरी तैयारी कर ली है।

 
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विस्तार
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अंडरग्राउंड होकर क्राइम करने वाले माफिया पर पुलिस की खुफिया नजरें बनी हुई हैं। बदमाश आसपास के जिलों से चुनावी ताल ठोकने वालों के मददगार होने का दम भर रहे हैं। उनकी मंशा है कि किसी तरह से उन्हें ऐसा नया शरणदाता मिल जाए कि उनकी बची हुई संपत्ति और सुख-चैन बरकरार रहे। या फिर अपने मंसूबे पूरे करने के लिए अपने पुराने शरणदाताओं की दावेदारी मजबूत करें।
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मगर, पुलिस भी इनकी हर गतिविधियों पर निगाहे टिकाए हुए है। हर थाने के आठ से 10 बदमाशों यानी जिले में 200 से अधिक बदमाशों पर पुलिस की नजर है।

कई के गुंडा, जिला बदर की फाइल तैयार हो रही है तो टॉप टेन बदमाशों पर एलआईयू और दूसरे खुफिया विभाग नजर रखे हैं। मकसद यही है कि इनकी वजह से लोकसभा चुनाव में कोई खलल न पड़ने पाए।

शहर से दूरी बना चुके और जमानत पर बाहर आए माफिया अजीत शाही, बिहार से विधायक रहा माफिया राजन तिवारी हो या फिर हाल में जमीन का जालसाज कमलेश और दीनानाथ, सब पर पुलिस के खुफिया विभाग की नजर है। सूत्रों की मानें तो पुलिस को यह भी पता चल गया है कि इस समय कौन कहां पर छिपा है और किस प्रभावशाली की गाड़ी में बैठकर खुद को बचाने की कोशिश कर रहा है।
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पुलिस अपने अंदाज में उन तक यह संदेश पहुंचा भी चुकी है कि अगर गोरखपुर की तरफ आ गए तो फिर खैर नहीं। इसका ही असर है कि जमानत पर बाहर आने वाले माफिया भी अब शहर के ठिकानों को छोड़कर पड़ोसी जिले के पैतृक गांव या फिर लखनऊ में रहकर समय काट रहे हैं।

इन सबको यह मालूम भी हो चुका है कि अगर गोरखपुर में फिर से किसी केस में उनका नाम आया तो बची संपत्ति को भी कोई बचा नहीं पाएगा। पुलिस यह जानने की कोशिश में भी लगी है कि आखिर वास्तव में यह बाहर रहकर कौन सा काम कर रहे हैं। इसके पीछे का मकसद है कि यह पता चल सके कि दोबारा कहीं से यह अपराध में संलिप्त तो नहीं हो रहे।

हिस्ट्रीशीटर, गैंगस्टर शरण पाने की जुगत में
कई हिस्ट्रीशीट और गैंगस्टर वर्तमान में किसी न किसी की मदद से सत्ता के करीब आने की जुगत में भी हैं। किसी ने प्राथमिक सदस्यता ले ली है और यह बता रहे हैं कि वह अपराध से दूरी बना लिए हैं। पुलिस भी उनकी निगरानी कर रही है कि ताकि यह पता चले कि अपराध से वास्तव में उनकी कितनी दूरी हो गई है।
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हर थाने के नए और पुराने बदमाशों पर नजर
कभी सत्ता में रह चुके पार्टी से जुड़े पुराने हिस्ट्रीशीट हों या फिर नए अपराध के मामलों में नाम सामने आने के बाद गैंगस्टर, हिस्ट्रीशीटर बनाए गए बदमाश हों, सब पर पुलिस की नजर बनी हुई है। बीट पुलिस अधिकारी और हलका दरोगा रोजाना ही उनके घरों पर पहुंचकर उनकी मौजूदगी को जांच रहे हैं। कई के परिवार वालों ने यह तक रिपोर्ट दे दी है कि वह दूसरे शहर में कमा रहे हैं और वह गोरखपुर आ ही नहीं रहे हैं।

एसएसपी डॉ गौरव ग्रोवर ने बताया कि हर बदमाश पर पुलिस की नजर रही है। चुनाव को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। बदमाश कोई भी हो अगर अपराध में उसका नाम सामने आएगा तो पुलिस सख्त कार्रवाई करेगी।
 
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