पुराने कब्रिस्तान और सैकड़ों साल पहले उनमें दफन मुर्दे भी पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन सकते हैं। यह सुनकर हैरत हो सकती है, लेकिन पुरखों के स्मृतियों की डोर से उन्हें जोड़ने के लिए प्रदेश सरकार ने शहर में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान बने कब्रिस्तानों को पर्यटन स्थल के तौर पर बढ़ावा देने का फैसला किया है।
इसके तहत गोरखपुर शहर में मौजूद ईसाई कब्रिस्तानों में दफन लोगों की जानकारी ऑनलाइन एकत्र कर, पयर्टन विभाग की वेबसाइट पर अपलोड की जाएगी। यह काम पूरा हो जाने पर विदेशी पर्यटकों को पहले की तरह यहां आकर पुरखों की कब्र तलाशने के लिए इन कब्रिस्तानों में नहीं भटकना होगा।
वे अपने देश से ही इंटरनेट के जरिए पुरखों की कब्र का पता लगाकर गोरखपुर आकर श्रद्धासुमन अर्पित कर सकेंगे। शोधार्थी ब्रिटिश काल के कब्रिस्तानों की वास्तुकला को देखने आ सकेंगे। इससे उनकी परेशानी भी कम हो जाएगी और समय भी बचेगा।
दूसरी ओर राज्य सरकार को पर्यटकों के आने पर विदेशी मुद्रा की आय होगी। पर्यटन विभाग की मानें तो पुराने मामलों में लोग कंप्यूटर में दफनाने की तारीख डालकर अपने पुरखों के बारे में जानकारी हासिल कर सकते हैं। जो मामले ज्यादा पुराने नहीं हैं, उनमें नाम के सहारे ही ब्योरा तलाशा जा सकता है।