चिड़ियाघर में खाली है जेब्रा का बाड़ा, लखनऊ से लाने में नहीं मिली सफलता
गोरखपुर। चिड़ियाघर में दर्शकों को बहुत जल्द जिराफ या गौर देखने को मिल सकते हैं। जेब्रा के बाड़े में चिड़ियाघर प्रबंधन इन दोनों में से किसी एक को लाने की तैयारी कर रहा है। बाड़े में परिवर्तन के लिए चिड़ियाघर प्रबंधन सेंट्रल जू अथॉरिटी (सीजेडए) को पत्र लिखेगा।
शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान के उद्घाटन के बाद से ही जेब्रा का बाड़ा खाली है। चिड़ियाघर प्रशासन को जेब्रा लाने में सफलता नहीं मिली है। इसीलिए अब वह इसकी जगह दूसरे वन्यजीव लाने की तैयारी कर रहा है। चिड़ियाघर प्रबंधन की कोशिश है कि यहां जिराफ को लाया जाए। जिराफ भी लंबा जानवर है और यहां का मौसम भी उसके लिए अनुकूल है। जिराफ को आमतौर पर गर्म और शुष्क मौसम पसंद होता है। यदि जिराफ नहीं तो फिर इसमें गौर को लाया जाएगा। गौर (भारतीय बाइसन) एक बड़ा और शक्तिशाली वन्यजीव है, जो भारत और दक्षिण एशिया के जंगलों और घास के मैदानों में पाया जाता है।
गौर को आमतौर पर गर्म और आर्द्र मौसम पसंद होता है। इन जानवरों को रखने के लिए चिड़ियाघर प्रबंधन को बाड़े में परिवर्तन करना होगा। इसके लिए सीजेडए को पत्र लिखने की तैयारी है। अनुमति मिलने के बाद परिवर्तन कर इन जानवरों को लाया जाएगा।
लखनऊ की आबोहवा रास आई तो गोरखपुर नहीं लाए जा सके जेब्रा
गोरखपुर चिड़ियाघर के लिए इजरायल से डेढ़ करोड़ रुपये खर्च कर छह जेब्रा करीब लाए गए थे। इन्हें लाने के बाद लखनऊ चिड़ियाघर में रखा गया था। इसके बाद इन्हें गोरखपुर चिड़ियाघर लाने की तैयारी की गई, लेकिन जिस बाड़े में वह रखे गए उसमें वह पकड़ में नहीं आ सके। कई बार चिड़ियाघर प्रशासन ने प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इतना ही नहीं यहां से छह माह के लिए लखनऊ चिड़ियाघर में जू-कीपर भेजे गए। जू-कीपर भेजने का उद्देश्य था कि जेब्रा से जान-पहचान और उनके हाव-भाव समझने का, लेकिन वह भी सफल नहीं हुए। इस बीच दो जेब्रा की मौत भी हो गई। इसके बाद फिर से एक कमेटी बनी जिसने जेब्रा पर अध्ययन किया। पता चला कि अब उन्हें लखनऊ की आबोहवा रास आ गई है।
कोट...
चिड़ियाघर में जेब्रा का बाड़ा लंबे समय से खाली है। लखनऊ से जेब्रा नहीं आ सका। इसकी जगह अब जिराफ या गौर को लाने की योजना बनाई जा रही है। बाड़े में बदलाव के लिए सीजेडए को पत्र लिखा जाएगा।
- डॉ. योगेश प्रताप सिंह, उप निदेशक, चिड़ियाघर