वर्ष 2021 में दूसरे चिड़ियाघरों से आए थे उम्रदराज जानवर
एक ही तरीके से हो रही है चिड़ियाघर में जानवरों की मौत
गोरखपुर। चिड़ियाघर में इस समय बूढ़े जानवरों की भरमार है। उद्घाटन के समय दूसरे चिड़ियाघरों से वही जानवर यहां आए, जिन्होंने अपनी औसत उम्र पूरी कर ली। अब यहां पर एक के बाद एक जानवर बीमार पड़ रहे हैं।
शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान में इस समय करीब 20 ऐसे मांसाहारी जानवर हैं, जिनकी उम्र 12 साल से अधिक है। इसमें सात तेंदुए हैं। तेंदुए की औसत उम्र 12 से 14 वर्ष ही होती है। चिड़ियाघरों में देखभाल के चलते एक से दो साल अधिक जी जाते हैं। पटौदी की उम्र करीब 15 वर्ष है। उसने भी अपनी औसत उम्र पार कर ली है। वहीं, बाघिन मैलानी (13) और गीता (11) वर्ष की है। इन सभी की औसत उम्र करीब 15 वर्ष होती है। शाकाहारी जानवरों में दरियाई घोड़ा लक्ष्मी और कई हिरन भी उम्रदराज हैं।
दरअसल, चिड़ियाघर के उद्घाटन (वर्ष 2021) के समय कानपुर और लखनऊ से बहुत सारे वन्यजीव लाए गए थे। इनमें ज्यादातर ऐसे थे जो अपनी औसत उम्र के करीब थे। आईवीआरआई की टीम ने भी अपनी प्राथमिक रिपोर्ट में यह कहा है कि गोरखपुर प्राणि उद्यान के अधिकांश वन्यजीवों ने अपनी औसत उम्र पार कर ली है। इन्हें अधिक देखभाल की जरूरत है।
वर्जन...
चिड़ियाघर में अधिकांश जानवरों ने अपनी औसत उम्र पार कर ली है। हेल्थ ऑडिट में फिलहाल सभी स्वस्थ मिले हैं। इनकी विशेष देखभाल की जाएगी।
- विकास यादव, निदेशक, चिड़ियाघर