तीन सालों में हुई 54 हजार रजिस्ट्री की चल रही जांच, आयकर विभाग जल्द जारी कर सकता है नोटिस
लखनऊ, वाराणसी और गोरखपुर आयकर विभाग की संयुक्त टीम ने रजिस्ट्री विभाग में की थी जांच
गोरखपुर। जमीनों की रजिस्ट्री में गलत पैन नंबर दर्ज कराते हुए लेन-देन छिपाने के मामले में आयकर विभाग ने जांच तेज कर दी है। सूत्रों की मानें तो बीते तीन सालों की रजिस्ट्री की जांच चल रही है और इसमें अब तक 700 से ज्यादा मामलों में गलत पैन नंबर लगाए गए हैं। अभी यह संख्या और बढ़ सकती है। हालांकि इसमें 75 रजिस्ट्री ही 70 लाख से छह करोड़ के बीच की है, जिसमें आय कर चोरी का शक है। बाकी रजिस्ट्री 10 से 30 लाख के बीच की है। मामले की जांच चल रही है। जल्द ही मामले में आयकर विभाग नोटिस जारी कर सकता है।
आयकर विभाग की क्राइम इन्वेस्टिगेशन टीम ने निबंधन कार्यालय से प्रति वर्ष भेजी गई रजिस्ट्री के रिकॉर्ड की जांच की तो पता चला कि महानगर क्षेत्र में वित्तीय वर्ष 2022-23, 2023-24 और 2025 में बहुत सारी रजिस्ट्री में गलत पैन नंबर दर्ज किए गए हैं। इसके बाद पांच अगस्त 2025 को लखनऊ, वाराणसी और गोरखपुर आयकर विभाग की संयुक्त टीम ने रजिस्ट्री विभाग में जांच की थी। मौके पर ही टीम ने रैंडम 100 रजिस्ट्री की जांच की तो पता चला कि 70 रजिस्ट्री में गलत पैन नंबर लगाए गए थे। इसके बाद टीम ने कुल 54 हजार रजिस्ट्री का ब्योरा भी पैन ड्राइव में टीम साथ ले गई। अब इस मामले में जांच आगे बढ़ रही है। सूत्रों की माने तो आयकर की चोरी में शहर के 25 से ज्यादा रईस आयकर विभाग के रडार पर हैं। तीन साल में ज्यादा निवेश वाले टॉप 75 रजिस्ट्री में आयकर चोरी की आशंका है। अब इससे कम रकम वाली रजिस्ट्री की गहनता से छानबीन चल रही है।
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बड़ों के खेल में फंसेंगे छोटे भी
आयकर विभाग की जांच में कम निवेश वाली रजिस्ट्री का भी ब्यौरा खंगाला जा रहा है। जल्द ही टीम रजिस्ट्री विभाग से मूल दस्तावेज मंगा सकती है। सूत्रों की मानें तो कुछ बड़े रईसों ने रजिस्ट्री में आयकर चोरी के लिए गलत पैन नंबर लगाए थे, अब उनकी जांच तो चल ही रही है, कम निवेश वाले लोग भी फंसेंगे। चर्चा यह भी कि कुछ ऐसे भी मामले हैं जिसमें विक्रेता या क्रेता के पास पैन नंबर नहीं था तो अधिवक्ताओं ने ही फर्जी पैन नंबर लगवा दिए। जांच में इन सब पहलुओं को भी देखा जा रहा है।