टप्पा खुटहन में जमीन चिह्नित, श्रमजीवी महिला छात्रावास का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया
स्वीकृति मिलते ही 47 करोड़ रुपये की लागत से शुरू होगा निर्माण कार्य
गोरखपुर। शहर में आकर नौकरी करने वाली महिलाओं के लिए राज्य सरकार सुरक्षित और सस्ती आवासीय सुविधा प्रदान करने की योजना बना रही है। इसके लिए चरगावां 500 बेड की क्षमता वाले श्रमजीवी महिला छात्रावास का निर्माण कराया जाएगा। जिला प्रोबेशन विभाग ने जमीन चिह्नित कर शासन को प्रस्ताव भेज दिया गया है। स्वीकृति मिलते ही निर्माण शुरू कर दिया जाएगा।
शहर में बड़ी संख्या में निजी व सरकारी क्षेत्र के महिला कर्मी कार्यरत हैं। ग्रामीण क्षेत्र या दूसरे जिले से आने वाली महिलाओं को किराए पर कमरा खोजने में बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इसीलिए योगी सरकार ने इन कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित और सस्ती आवासीय सुविधा प्रदान करने के लिए श्रमजीवी महिला छात्रावास बनवाने का निर्णय लिया है। प्रमुख शहरों की तर्ज पर गोरखपुर में भी 500 बेड की क्षमता वाले श्रमजीवी महिला छात्रावास का निर्माण कराया जाएगा। महिला छात्रावास के लिए चरगावां के टप्पा खुटहन में 6,640 वर्ग मीटर जमीन चिह्नित कर ली गई है। यहां करीब 47 करोड़ रुपये की लागत से श्रमजीवी महिला छात्रावास का निर्माण कराया जाएगा।
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अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा छात्रावास
चरगावां के टप्पा खुटहन में बनने वाले महिला छात्रावास में सीसीटीवी कैमरे, अग्निशमन यंत्र, शिशु सदन (क्रेच), जिम सेंटर, ऑडिटोरियम, लॉन्ड्री, वाहन पार्किंग, कैंटीन और डिपार्टमेंटल स्टोर की सुविधा प्रदान की जाएगी। सुरक्षा के लिए गार्ड भी लगाए जाएंगे। यहां पर वार्डेन, सुरक्षा स्टॉफ, हाउसकीपिंग स्टॉफ एवं आवश्यकतानुसार अन्य कर्मियों की तैनाती की जाएगी।
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सखी निवास के लिए शुरू हुई भवन की तलाश
जिला प्रोबेशन अधिकारी समर बहादुर ने बताया कि शहर में जल्द ही 50 बेड की क्षमता वाले सखी निवास का निर्माण भी शुरू किया जाएगा। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से संचालित मिशन शक्ति की उपयोजना समर्थ के तहत सखी निवास स्थापित किया जाएगा। सखी निवास में उन महिलाओं को जगह दी जाएगी, जो दूसरे जिले से यहां आती हैं। सखी निवास एक सरकारी योजना है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित आवास और सहायता प्रदान करना है। इस योजना के तहत महिलाओं को अस्थायी रूप से रहने, भोजन, वस्त्र और चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाएं मिलेंगी। साथ ही उन्हें नई शुरुआत करने के लिए मानसिक, सामाजिक और व्यावसायिक सहायता दी जाएगी।