गोरखपुर। नेपाल के साथ ही गोरखपुर और आसपास के क्षेत्रों में हो रही बारिश का असर एक बार फिर नदियों पर नजर आने लगा है। बड़हलगंज ब्लाॅक क्षेत्र में प्रवाहित होने वाली सरयू बीते 24 घंटे में जहां 90 सेंटीमीटर के आसपास बढ़ी है, वहीं राप्ती नदी के जलस्तर में भी 1.90 सेमी वृद्धि दर्ज की गई है। अगर बारिश नहीं थमी और इसी रफ्तार से नदियां बढ़ती रहीं तो रविवार की रात तक दोनों ही नदियां लाल निशान पार कर सकती हैं।
मिली जानकारी के अनुसार, बरहज देवरिया में सरयू नदी खतरे के निशान से महज 90 सेमी बह रही है। वह अब खतरे के निशान से मात्र 44 सेमी नीचे रह गई है। बर्डघाट पर राप्ती नदी खतरे के निशान से 1.11 मीटर नीचे है। जबकि यह नदी तीन मीटर से ज्यादा नीचे जा चुकी थी। सरयू नदी में तीन बार बाढ़ आ चुकी है। इसका प्रमुख कारण जिस क्षेत्र से सरयू निकली है उस क्षेत्र में नेपाल में भारी बारिश है, जिससे सरयू नदी पर बने शारदा बैराज का पानी नदी में छोड़े जाने से गांव बाढ़ के पानी से घिर गए थे।
लेकिन, पिछले कुछ दिनों में उसका भी जलस्तर काफी नीचे चला गया गया था। दो दिन की बारिश ने एक बार फिर नदियों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। यदि जलस्तर इसी तरह से बढ़ता रहा तो सरयू में चौथी बार बाढ़ आ जाएगी। अन्य नदियां भी लाल निशान को पार कर सकती हैं।
नेपाल की पहाड़ियों में हुई है खूब बारिश
दो दिनों की बारिश नेपाल की पहाड़ियों में भी खूब हुई है। इसका सबसे अधिक असर गंडक, रोहिन और कोसी के कैचमेंट एरिया में देखने को मिला है। इस एरिया में 200 मिमी से अधिक बारिश दर्ज हुई है। जबकि, राप्ती के कैचमेंट में 100 से 125 मिली मीटर बारिश हुई है। इसका सबसे अधिक असर गंडक क्षेत्र में देखने को मिला। अब तक बाल्मिकी बैराज से 2003 में 6.40 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था। शनिवार को वहां से दूसरा सबसे अधिक 5.40 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। इस नाते उस क्षेत्र में गंडक खतरे के निशान को पार गई है।
राप्ती और सरयू का जलस्तर अभी और बढ़ सकता है। रोहिन का जलस्तर कुछ बढ़ेगा लेकिन, इन नदियों के खतरे का निशान पार करने की संभावना कम है। वैसे विभाग हर तरह से तैयार है।
विकास कुमार सिंह, मुख्य अभियंता, सिंचाई विभाग