रामगढ़ताल के चारों तरफ गोरखपुर विकास प्राधिकरण रिंग रोड का निर्माण कर रहा है। मोहद्दीपुर से सहारा एस्टेट तक सड़क निर्माण में पूर्व के आदेश की अवहेलना पर उच्च न्यायालय ने जीडीए उपाध्यक्ष के खिलाफ जिले के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के माध्यम से वारंट जारी किया है। कोर्ट ने अगली तिथि पर उपाध्यक्ष की उपस्थिति सुनिश्चित कराने का आदेश जारी किया है।
न्यायाधीश सलिल कुमार राय ने मंजू सिंह एवं 30 अन्य लोगों की ओर से दाखिल अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश सुनाया है। प्राधिकरण उपाध्यक्ष को नोटिस दिए जाने के बाद भी विपक्षी पक्ष का न तो कोई अधिवक्ता उपस्थित हुआ और न ही वह व्यक्तिगत रूप से न्यायालय में उपस्थित हुए।
विपक्षी की ओर से बीते दो अप्रैल के आदेश में मांगे गए उत्तर को प्रस्तुत नहीं किया गया है। ऐसे में गोरखपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के माध्यम से प्राधिकरण उपाध्यक्ष के विरूद्ध जमानती वारंट जारी करते 28 मई को
उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
वादी का आरोप है कि प्राधिकरण ने बिना मुआवजा दिए ही मोहद्दीपुर से सहारा एस्टेट तक रामगढ़ताल किनारे सड़क का निर्माण शुरू करा दिया। इसपर हाईकोर्ट में वाद दाखिल किया गया, लेकिन प्राधिकरण ने वहां कहा कि उनकी ओर से कोई सड़क निर्माण कार्य नहीं कराया जा रहा है।
उधर, प्राधिकरण के उपाध्यक्ष आनंद वर्द्धन ने कहा कि न्यायालय के आदेश की जानकारी हुई है। वादी की ओर से कोर्ट के सामने बहुत से तथ्य छिपाए गए हैं। न्यायालय के आदेशानुसार प्राधिकरण की ओर से साक्ष्य समेत पूरा पक्ष रखा जाएगा।