एचओ कोटा प्रकरण : हिरासत में लिए गए एजेंट को पूछताछ के बाद छोड़ा गया
जांच में रेलवे बोर्ड में तैनात कुछ लोगों की भूमिका मिली संदिग्ध
गोरखपुर। रेल राज्यमंत्री के पीए के लेटरहेड पर हेड ऑफिस (एचओ) कोटा आवंटन और यात्रियों से रुपये लेने की जांच में रेलवे बोर्ड में तैनात कुछ रेलकर्मियों की भूमिका संदिग्ध मिली है। विजिलेंस टीम ने मुंबई गए यात्रियों से भी संपर्क साधा है, जल्द ही उनके बयान दर्ज किए जा सकते हैं। उधर, कोटा के तहत टिकट कन्फर्म कराने के आरोपी एजेंट को हिरासत में लेकर पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया है। विजिलेंस की जांच आगे बढ़ने से रेल महकमे में हड़कंप मच गया है।
छह जून को गोरखपुर से एलटीटी जा रही काशी विश्वनाथ एक्सप्रेस में 3 एसी कोच में एक ही पीएनआर पर पांच यात्रियों का टिकट कन्फर्म हुआ था। टिकट कन्फर्म कराने के लिए रेल राज्यमंत्री के पीए-2 के लेटरहेड पर हेड आफिस में एचओ कोटा के लिए फैक्स आया था। इसके आधार पर टिकट कन्फर्म कर दिया गया। लेकिन, रैंडम जांच के दौरान जब टीटीई ने ट्रेन में यात्री से पूछा तो उसने एजेंट को प्रति टिकट 5500 रुपये देने की बात कबूल की।
लिखा-पढ़ी के बाद टीटीई ने इसकी जानकारी अधिकारियों को दे दी। ट्रेन में कामर्शियल विभाग के एक रेलकर्मी ने भी यात्रियों से पूछताछ की थी। स्थानीय विजिलेंस की अब तक की जांच में क्षेत्रीय रेलवे और रेलवे बोर्ड के कुछ कर्मियों की भूमिका संदिग्ध मिली है। हालांकि, अब यह जांच रेलवे बोर्ड ने सेंट्रल विजिलेंस को सौंप दी गई है।