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Gorakhpur News: एबीवीपी के भूमि पूजन के लिए कुलपति का निमंत्रण पत्र वायरल...कांग्रेस ने बनाया मुद्दा

Sat, 09 Nov 2024 12:32 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर

सार

व्हाट्सएप वायरल मैसेज: अभाविप का गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर में 22, 23 एवं 24 नवंबर को राष्ट्रीय अधिवेशन होना है। राष्ट्रीय अधिवेशन को लेकर शुक्रवार को भूमि पूजन कराया गया। इस भूमि पूजन कार्यक्रम में आने के लिए कुलपति की तरफ से पोस्ट विश्वविद्यालय परिवार के ग्रुप में डाला गया। किसी ने स्क्रीन शॉट लेकर वायरल कर दिया।शुक्रवार की दोपहर होते-होते यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा।
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वायर मैसेज - फोटो : स्त्रोत- सोशल मीडिया
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विस्तार
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गोरखपुर। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का 70वें राष्ट्रीय अधिवेशन को लेकर शुक्रवार को भूमि पूजन था। भूमि पूजन को लेकर डीडीयू की कुलपति प्रो. पूनम टंडन का एक आमंत्रण पत्र शुक्रवार को सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। इसमें वह भूमि पूजन कार्यक्रम में सपरिवार आमंत्रित कर रही हैं।

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राजनीतिक दल के लोग इस पोस्ट का स्क्रीनशॉट लेकर सोशल मीडिया पर वायरल करते हुए कुलपति के एक राजनीतिक दल के छात्र संगठन के कार्यक्रम में आमंत्रण पर सवाल उठाने लगे।

अभाविप का गोरखपुर विश्वविद्यालय परिसर में 22, 23 एवं 24 नवंबर को राष्ट्रीय अधिवेशन होना है। राष्ट्रीय अधिवेशन को लेकर शुक्रवार को भूमि पूजन कराया गया। इस भूमि पूजन कार्यक्रम में आने के लिए कुलपति की तरफ से पोस्ट विश्वविद्यालय परिवार के ग्रुप में डाला गया।
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किसी ने स्क्रीन शॉट लेकर वायरल कर दिया। वायरल स्क्रीन शॉट में यह पोस्ट डॉ. एस रस्तोगी की तरफ से किया गया है। शुक्रवार की दोपहर होते-होते यह पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा। कांग्रेस के विश्वविजय सिंह, आलोक शुक्ला, जिलाध्यक्ष निर्मला पासवान ने पोस्ट को सोशल मीडिया पर डालने के साथ कुलपति को अपनी गरिमा के विपरीत कार्य पर सवाल उठाए।

विश्वविद्यालय ने जारी किया स्पष्टीकरण
सोशल मीडिया पर कुलपति का पोस्ट वायरल होने की जानकारी के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने शाम को स्पष्टीकरण जारी किया। इसमें लिखा है कि... विश्वविद्यालय प्रशासन यह स्पष्ट करना चाहता है कि एबीवीपी ने कुलपति को एक मेहमान के रूप में अपने कार्यक्रम में आमंत्रित किया था।

विश्वविद्यालय इस कार्यक्रम का मेजबान नहीं है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने एबीवीपी की ओर से कोई निमंत्रण नहीं भेजा है। यदि कोई संदेश इस संदर्भ में प्रसारित हो रहा है, तो वह कुलपति की स्वीकृति के बिना है।”

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