सीतापुर से रेस्क्यू कर लाई गई थी बाघिन, वहां ज्यादा हो गई है बाघों की संख्या
बाघिन नहीं ले रही पूरी खुराक, कीपर को देखकर हो रही आक्रामक
गोरखपुर। चिड़ियाघर में सीतापुर के जंगलों से आई बाघिन को क्वारंटीन सेंटर रास नहीं आ रहा है। नाइटसेल में वह तनाव में रहती है और कीपर के पास जाते ही आक्रामक हो जाती है। बाघिन सामान्य से कम खुराक भी ले रही है। चिड़ियाघर के चिकित्सक उसकी विशेष निगरानी कर रहे हैं।
दरअसल, सीतापुर के महोली तहसील के नरनी गांव के जंगल में बाघों की संख्या क्षमता से अधिक हो गई थी। इसी कारण बीते शनिवार की देर रात बाघिन को ट्रैंकुलाइज कर पकड़ा गया। पकड़े जाने के बाद उसे इलसिया वन उद्यान (पिंजरा नगर) ले जाया गया, जहां वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. दयाशंकर और डॉ. दीपक वर्मा ने उसका चिकित्सकीय परीक्षण किया। रिपोर्ट में बाघिन पूरी तरह स्वस्थ पाई गई।
इसके बाद लखनऊ स्थित प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य जीव उत्तर प्रदेश अनुराधा वेमुरी ने गोरखपुर स्थानांतरण की मंजूरी दी। रविवार शाम वन विभाग की टीम बाघिन को लेकर गोरखपुर के लिए रवाना हुई और सोमवार सुबह प्राणि उद्यान में सुरक्षित पहुंचाया गया। यहां पर उसे क्वारंटीन सेंटर में रखा गया है। बाघिन को खाने के लिए बकरा और पड़वे का मीट दिया जा रहा है। कीपर किनारे से सेल में मीट डालकर निकल जाते हैं।
बाघिन यदि कीपर या चिकित्सक को पास में देखती है तो आक्रामक हो जाती है। कई बार वह हमला करने के चक्कर में खुद को चोटिल कर ले रही है।
चिड़ियाघर के उप निदेशक एवं मुख्य वन्यजीव चिकित्सक डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि बाघिन का स्वभाव अभी उग्र है। जंगल के माहौल को वह याद कर रही है। उससे दूरी बनाई गई है। धीरे-धीरे उसे यहां के माहौल में ढाला जा रहा है। बाघिन को आवश्यक सप्लीमेंट दवाएं दी जा रही हैं। उसके शरीर पर कुछ चोटें थीं, जिसका इलाज किया जा रहा है।