सीतापुर से लाई गई बाघिन को चिड़ियाघर के अस्पताल में क्वारंटीन में रखा गया है। जंगल से सीधे आने की वजह से उसका व्यवहार थोड़ा आक्रामक है। कीपर को देख वह दहाड़ रही है। शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणी उद्यान में बाघिन के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं।
चिड़ियाघर के उप निदेशक एवं मुख्य वन्यजीव चिकित्सक डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बताया कि बाघिन आठ साल की है और पूरी तरह स्वस्थ है। उसे आइसोलेशन वार्ड में क्वारंटीन में रखा गया है। जंगल से सीधे आने के कारण उसका स्वभाव थोड़ा आक्रामक है। इसकी गतिविधियों पर निगरानी रखी जा रही है।
धीरे-धीरे वह चिड़ियाघर के माहौल में ढल जाएगी। व्यवहार सामान्य होने के बाद उसे क्रॉल में शिफ्ट कर दिया जाएगा। वह सामान्य से थोड़ी कम खुराक ले रही है। नई जगह पर ऐसा होता है। एक से दो दिन में यह ठीक हो जाएगा। डॉ. योगेश ने बताया कि हर गतिविधि की रिपोर्ट तैयार की जा रही है।
दरअसल, सीतापुर के महोली तहसील के नरनी गांव में बाघों की संख्या क्षेत्र की क्षमता से अधिक हो गई थी। इसी कारण शुक्रवार देर रात बाघिन को ट्रैंकुलाइज कर पकड़ा गया। पकड़े जाने के बाद उसे इलसिया वन उद्यान (पिंजरा नगर) ले जाया गया, जहां चिकित्सकीय परीक्षण में स्वस्थ पाई गई।
इसके बाद उसके गोरखपुर स्थानांतरण की मंजूरी दी गई। शनिवार शाम वन विभाग की टीम बाघिन को लेकर गोरखपुर के लिए रवाना हुई और रविवार को प्राणी उद्यान में सुरक्षित पहुंचाया गया।