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Gorakhpur News: तत्कालीन शाखा प्रबंधक और अकाउंटेंट पर लटकी बर्खास्तगी की तलवार

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गोरखपुर। एसबीआई की जंगल कौड़िया शाखा में 80 लाख से अधिक की जालसाजी के मामले में तत्कालीन शाखा प्रबंधक और अकाउंटेंट की बर्खास्तगी हो सकती है। बैंक प्रबंधन से मिल रही जानकारी के अनुसार, जांच में इन दोनों की पूरी तरह से मिलीभगत सामने आ रही है। हालांकि जांच अभी जारी है। पुलिस के साथ बैंक की विजिलेंस टीम भी अपनी अलग जांच कर रही है।
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सूत्रों का कहना है कि इस मामले में मास्टरमाइंड कैंटीन बॉय तो बस मोहरा है। उसकी आड़ में तत्कालीन शाखा प्रबंधक जालसाजी करता रहा। उसने कैंटीन बॉय के भाई, पिता और बहन के नाम पर तीन जगहों पर ग्राहक सेवा केंद्र भी खुलवाया था। इन केंद्रों से भी जालसाजी होने के संकेत मिल रहे हैं। फिलहाल जांच रिपोर्ट आने पर और भी चौंकाने वाले खुलासे होने की आशंका व्यक्त की जा रही है।



कूटरचित दस्तावेजों व बंद खातों के साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए जंगल कौड़िया एसबीआई शाखा में 80 लाख रुपये से ज्यादा की जालसाजी सामने आने के बाद से पुलिस ने रविवार को अकाउंटेंट अमरेंद्र सिंह को गिरफ्तार किया था। तत्कालीन शाखा प्रबंधक कुमार भास्कर भूषण और मास्टरमाइंड पंकज मणि के अंतरिम जमानत के कागज दिखाने पर उनकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। अब पुलिस जमानत की अवधि बीतने का इंतजार कर रही है।
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हालांकि कानूनी प्रक्रिया की जटिलताओं को देखते हुए गिरफ्तारी संभव नहीं दिखती। उधर, बैंक प्रबंधन से मिल रही जानकारी के अनुसार, तत्कालीन शाखा प्रबंधक और अकाउंटेंट की बर्खास्तगी तय मानी जा रही है। जांच में जो संकेत मिल रहे हैं, उसमें इन दोनों के साथ कैंटीन बॉय की भी पूरी तरह से मिलीभगत है।



खाते की जांच के लिए जुट रही भीड़



एसबीआई जंगल कौड़िया शाखा में खातों की जांच और पासबुक अपडेट के लिए उपभोक्ताओं की भीड़ रोजाना उमड़ रही है। बृहस्पतिवार को भी बड़ी संख्या में उपभोक्ता आए और खातों की जांच कराई। लोगों का कहना था कि जिस तरह से जालसाजी हुई है, उन्हें अपने खातों की चिंता सताने लगी। वे अपनी रकम को सुरक्षित जानने के लिए बैंक आए हैं। उनकी रकम पूरी तरह से सुरक्षित मिली।



25 मृतकों के खाते हुए बंद



जंगल कौड़िया की शाखा में कुल 55 हजार खाते हैं। इसमें 350 खाते ऐसे हैं, जो पूरी तरह से निष्क्रिय हैं। इन खातों में लगभग 10 वर्ष से कोई लेन-देन नहीं हुआ। वहीं 25 खाते इस वर्ष बंद किए गए। ये वे खाते हैं, जिसे व्यक्ति के मृत होने पर परिजनों ने बंद कराया है। रकम भी परिवार को मिल चुकी है।



वर्जन



जंगल कौड़िया एसबीआई शाखा में जिस तरह की वित्तीय अनियमितता हुई, उसको देखते हुए तत्कालीन शाखा प्रबंधक और अकाउंटेंट की बर्खास्तगी अगर होती है तो कोई हैरान करने वाली बात नहीं है। बैंक का नियम-कानून किसी को भी तोड़ने का अधिकार नहीं होता है।
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-मनोज श्रीवास्तव, लीड बैंक मैनेजर
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