गोरखपुर। मोहद्दीपुर स्थित काव्यांजलि हाइट्स बनाने वाली कंपनी मेसर्स बांके बिहारी डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड से गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) उपविभाजन एवं प्रभाव शुल्क जमा कराएगा। प्राधिकरण की ओर से शुल्क जमा करने के लिए आठ अक्तूबर को ही बिल्डर को पत्र जारी कर दिया गया है। शिकायतकर्ता सौरभ जायसवाल द्वारा समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली (आइजीआरएस) पर की गई शिकायत के जवाब में जीडीए ने शुल्क जमा कराने के लिए बिल्डर को पत्र लिखने की जानकारी दी है।
वर्ष 2013 में पास मानचित्र में उपविभाजन एवं प्रभाव शुल्क मिलाकर डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक का बकाया था। बिल्डर को इस पर ब्याज भी चुकाना पड़ सकता है। मोहद्दीपुर निवासी सौरभ जायसवाल ने काव्यांजलि हाइट्स में निर्माण से जुड़ी एवं अन्य कमियों को लेकर शिकायत की है। निर्माण से जुड़ी शिकायत की जांच के लिए जीडीए उपाध्यक्ष ने प्राधिकरण के ओएसडी के नेतृत्व में टीम गठित की है। टीम की रिपोर्ट का इंतजार है। शिकायतकर्ता ने उपविभाजन शुल्क एवं प्रभाव शुल्क न जमा कराने की भी शिकायत की थी।
सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत दिए गए जवाब में जीडीए ने शिकायतकर्ता को बताया था कि बांके बिहारी डेवलपर्स से वर्ष 2013 में उपविभाजन शुल्क के रूप में 76 लाख 28 हजार रुपये, जबकि प्रभाव शुल्क के रूप में 76 लाख 93 हजार रुपये की मांग की गई थी, लेकिन हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के कारण पैसा जमा नहीं कराया गया। इसके बाद 2016 में हाई कोर्ट ने स्थगन हटा दिया था, लेकिन उसके बाद शुल्क को लेकर कोई मांग नहीं की गई। शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में इस बात का उल्लेख किया था। शिकायतकर्ता सौरभ जायसवाल ने बताया कि जीडीए की ओर से दिए गए जवाब में यह बताया गया है कि उपविभाजन एवं प्रभाव शुल्क के लिए बिल्डर को पत्र लिखा गया है।