सेवानिवृत्त कार्यालय अधीक्षक की पेंशन रोकने की तैयारी, सीपीओ दफ्तर में पहुंची कार्रवाई संबंधित फाइल
गोरखपुर। मॉडर्न कोच फैक्टरी, रायबरेली में फर्जी तरीके से बेटों की नियुक्ति कराने वाले दोनों रेलकर्मियों पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी है। मामले की जांच करने आई रेलवे की सेंट्रल विजिलेंस टीम ने जांच में आरोपों की पुष्टि कर दी है। रेलवे बोर्ड के निर्देश पर दोनों रेलकर्मियों और उनके बेटों के खिलाफ केस दर्ज कराने के बाद अब एक कर्मचारी (निलंबित चेयरमैन के पूर्व निजी सचिव) की बर्खास्तगी और दूसरे की पेंशन रोकने की कार्रवाई चल रही है।
रेलवे भर्ती बोर्ड के निर्देश पर पिछले महीने जांच करने आई दिल्ली विजिलेंस की टीम ने वर्ष 2018 से अब तक की हुई सभी नियुक्तियों से संबंधित 280 फाइलें अपने साथ ले गई थी। प्रारंभिक जांच के आधार पर पहले गोरखपुर आरआरबी के चेयरमैन नुरुद्दीन अंसारी और उनके निजी सचिव को निलंबित कर दिया गया था। सूत्रों की माने तो रेलवे बोर्ड ने शुक्रवार को ही इस संबंध में आरआरबी गोरखपुर के चेयरमैन को केस दर्ज कराने के लिए पत्र भेजकर निर्देश दिया है।
सूत्रों की माने तो मुख्य कार्मिक विभाग में पूर्व चेयरमैन के निजी सचिव-द्वितीय राम सजीवन की बर्खास्तगी की कार्रवाई चल रही है। वहीं, पूर्व कार्यालय अधीक्षक चंद्रशेखर आर्य का पेंशन 50 फीसदी तक रुक सकता है।
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सरकारी नौकरी के लालच में लगा दी बेटों की जिंदगी दांव पर
दोनों रेलकर्मियों ने सरकारी नौकरी की लालच में अपने बेटों की जिंदगी दांव पर लगा दी। नौकरी तो मिली नहीं अब धोखाधड़ी का केस लगने के बाद भविष्य की उम्मीदें भी खत्म हो गई हैं। वहीं, रेलवे में रसूख कायम रखने वाले दोनों कर्मचारियों बदनामी होने के बाद लोगों से मिलना-जुलना भी कम कर दिए हैं। आरआरबी दफ्तर के एक कर्मचारी ने बताया कि निलंबित चेयरमैन के भी दोनों खास रहे हैं। इसके अलावा कई अधिकारियों से भी इनके नजदीकी संबंध रहे हैं।
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ऐसे किया गया फर्जीवाड़ा
फिटर पद पर नियुक्ति के लिए सात नामों का पैनल तैयार किया गया था। इसमें दो अभ्यर्थी लोकेश कुमार और अनिल कुमार प्रमाण-पत्र सत्यापन में शामिल नहीं हुए। पता चला कि दोनों की नौकरी किसी दूसरे सरकारी विभाग में लग गई है। इसकी जानकारी होने के बाद दोनों रेलकर्मियों ने फर्जी तरीके से पैनल में नाम डालने की योजना बनाई। उन्होंने सौरभ (रोल नंबर 451021087010025) एवं राहुल प्रताप (रोल नंबर. 441018096950222) का नाम पैनल 26 अप्रैल 2024 को शामिल कर रायबरेली के प्रमुख मुख्य कार्मिक अधिकारी को भेज दिया। जबकि दोनों रोल नंबर अनुपस्थित रहने वाले लोकेश और अनिल का था। दिल्ली से आई विजिलेंस की टीम ने जांच में जब मामला पकड़ा तो रेलवे बोर्ड से कार्रवाई की सिफारिश करते हुए रिपोर्ट भेजी। रिपोर्ट के आधार पर दोनों रेलकर्मी और उनके बेटों पर केस दर्ज कराया गया है।