महंत दिग्विजयनाथ व महंत अवेद्यनाथ की पुण्यतिथि पर आयोजित संगोष्ठी में बोले संतोषाचार्य ''''सतुआ बाबा''''
पितृ पक्ष में गायों के दर्शन का विशेष महत्व
गोरखपुर। पहले जिस घर के दरवाजे पर गाय होती थी, संतजन वहीं विश्राम करते थे। गाय के गोबर से गणेश की प्रतिमा बनाकर पूजा करना हमारी संस्कृति रही है। पितृ पक्ष में गायों के दर्शन का विशेष महत्व है। देश में फैक्टरियां बंद होंगी तो हम उनके बिना रह सकते हैं लेकिन गोमाता न रहे तो जीवन सुरक्षित नहीं रह सकता।
ये बातें ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ की 56वीं एवं ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की 11वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित सात दिवसीय संगोष्ठी के पांचवें दिन ''''भारतीय संस्कृति एवं गो-सेवा'''' विषय पर संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि काशी से पधारे जगद्गुरु विष्णुस्वामी संप्रदायाचार्य संतोषाचार्य सतुआ बाबा ने कहीं।
नैमिषारण्य सीतापुर से आए स्वामी विद्याचैतन्य ने कहा कि गोरक्षपीठ पीठ वर्षों से सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति व गो-सेवा के लिए सदैव आगे बढ़कर कार्य किया है। उसी परंपरा को वर्तमान में पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने पूरे प्रदेश में बढ़ाया है। हनुमानगढ़ी अयोध्या से आए महंत राजू दास ने कहा कि गोमाता व भारतीय संस्कृति के लिए गोरक्षपीठ ने हमेशा से कार्य किया है। यह पूरी दुनिया के लिए माॅडल है। गोरक्षपीठ की विशेषता है कि यहां भारत के सभी नस्लों की गायों का संरक्षण व संवर्धन हो रहा है।
गोभक्त प्रहलाद ब्रह्मचारी ने कहा कि संसार में भारत को छोड़कर कोई ऐसा देश नहीं है जहां भगवान अवतार लेते हों, उसमें भी उत्तर प्रदेश में भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण का जन्म हुआ है। कुछ शोध में पता चला है कि यह जो गोरखपुर है यह भगवान राम की गोशाला थी। यहां लाखों की संख्या में गाएं पाली जाती थीं। इसीलिए भगवान गोरखनाथ ने इस स्थान को चुना।
बड़ौदा से आए महंत गंगादास ने कहा कि भगवान के 24 अवतारों में भगवान राम व भगवान श्रीकृष्ण का अवतार गोरक्षा के लिए हुआ था। इसलिए हमारा भी कर्तव्य है कि हम अपने घरों में गोपालन अवश्य करें। कालीबाड़ी मंदिर गोरखपुर के महंत रवींद्रदास ने कहा कि हमारे घरों में गोबर व गोमूत्र के बिना कोई भी पूजा सफल नहीं होती। कामदगिरी चित्रकूट से आए शशिभूषण दास ने कहा कि गाय पूरे विश्व की माता है। 84 लाख योनियों में केवल गाय ही एक ऐसी है, जिसका मूत्र व मल भी पवित्र माना गया है। नीमच मध्य प्रदेश से आए लालनाथ ने कहा कि गाय के शरीर से निकलने वाला हर पदार्थ कई रोगों में औषधि का कार्य करते हैं।