बड़हलगंज (गोरखपुर)। सिधुआपार गांव के करवनिया टोले के चार युवकों की मौत मामले में लोग भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। लोगों की मानें तो घटना से कुछ देर पहले फोरलेन की एक लेन को बंद कराकर दूसरे लेन से आवागमन कराया जा रहा था।
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इसी दौरान गलत दिशा में आ रहे बाइक सवार युवकों ने आगे चल रही ट्रैक्टर-ट्राली को ओवरटेक करने का प्रयास किया और अपनी जान गवां दी। घटना से परिवार वालों व ग्रामीणों में आक्रोश है। वहीं चार मौत के बाद से गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है। क्षेत्र के सिधुआपार गांव के करवनिया टोले के बाइक चार युवकों (राहुल, सुनील, अरविंद, प्रदीप) की गोरखपुर-वाराणसी हाईवे पर कार की टक्कर में शनिवार को मौत हो गई थी।
पुलिस व प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, चार पहिया वाहन गोरखपुर से वाराणसी की तरफ की अपने साइड से जा रही थी। वहीं, सड़क की एक लेन बंद होने के चलते चारों युवक ओझौली सर्विस रोड से फोरलेन को पकड़ लिया। वह गलत साइड से निकल रहे थे। आगे एक ट्रैक्टर-ट्राॅली जा रही थी। इसे ओवरटेक कर आगे निकलने की होड़ में सामने से आ रही चार पहिया वाहन से टकरा गए।
भिड़ंत इतनी तेज थी कि बाइक सवार चार युवकों में दो युवक 15-20 फीट ऊपर हवा में उछल कर नीचे गिरे। वहीं दो युवक कार में ही फंसकर लगभग 30 मीटर घिसटते चले गए। बताया जा रहा है कि उसी लेन पर पुल के पास पिंचिंग के लिए बोल्डर गिराया गया था। इसे एक क्रेन उस समय उठाकर किनारे रख रही थी। इसी को लेकर कुछ देर के लिए फोरलेन को वन-वे किया गया था।
हादसे के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को जिम्मेदार ठहरा रहे परिजन व ग्रामीण
गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन पर चार युवकों की मौत के लिए परिवार वालों व ग्रामीणों ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण को जिम्मेदार ठहराया है। उनकी मानें तो राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण की लापरवाही से घटना हुई है। जिस समय फोरलेन को वन वे किया गया था, वहां सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं किए गए थे।
दूसरी लेन में वाहन चालक अपने दिशा में न चलते हुए आड़े-तिरछा तरीके से अपने वाहन निकाल रहे थे। बाइक सवार चारों युवक सामने जा रही ट्रैक्टर-ट्राॅली को ओवरटेक कर रहे थे। ठीक उसी समय उनके सामने एक चार पहिया वाहन आ गया।
आरोप लगाया- फोरलेन सड़क का घटिया हुआ है निर्माण
लोगों ने आरोप लगाया कि बड़हलगंज से गोरखपुर फोरलेन सड़क सबसे घटिया निर्माण कार्य हुआ है। अभी बने दो साल भी नहीं हुआ है। ऐसा कोई दिन नहीं है जब इस पर कोई मरम्मत कार्य न चलता हो। जब-जब मरम्मत कार्य चलता है तब तक सड़क को वन वे करके आवागमन कराया जाता है।
सुरक्षा के कोई इंतजाम भी नहीं दिखते हैं। यह पहली बार नहीं है जब ऐसी लापरवाही सामने आई है। इस तरह की घटनाएं लगातार हो रही हैं। डॉ. मनोज यादव का कहना है कि देश में जितनी मौत बीमारी से नहीं बल्कि सर्वाधिक मौत दुर्घटना से हो रही है।
गांव में पसरा रहा सन्नाटा, नहीं जले चूल्हे
चार युवकों की सड़क हादसे में मौत के बाद गांव में दूसरे दिन भी सन्नाटा पसरा रहा। शनिवार रात से ही गांव के अधिकांश घरों में चूल्हा नहीं जला। रविवार की सुबह भी गांव में सन्नाटा पसरा हुआ था। रह-रह मृतक के घर से चित्कार व सिसकियों की आवाज सुनाई दे रही थी। चारों युवकों के दरवाजे पर ग्रामीणों व रिश्तेदारों की भीड़ जमा थी। हर कोई घटना से मर्माहत दिखा।
माता-पिता व छह बहनों की आंखों का चिराग था राहुल
सड़क हादसे में मृत राहुल के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। राहुल के पिता करमचंद के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। उसकी मां सोमारी देवी बार-बार एकलौटे बेटे को याद कर रो रहीं थीं। आसपास की महिलाएं पानी का छींटा मारकर होश में ला रही थीं। राहुल की कुछ दिन पहले परिवार के लोगों ने शादी तय की थी। अगले सप्ताह तिलक की तारीख तय होने वाली थी। राहुल छह बहनों का इकलौता लाडला भाई था। तीन बहनों की शादी हो चुकी है, तीन की जिम्मेदारी उसके कंधे पर थी।
बंगलूरू से एक सप्ताह पहले आया था अरविंद
अरविंद बंगलूरू में पेंटिंग का काम करता था। वह एक सप्ताह पहले कुछ दिन की छुट्टी लेकर गांव आया था। सुबह वह सुनील और राहुल के साथ घूमने निकल जाता था। मां मालती ने बेटे का शव जैसे ही देखा वह अचेत होकर गिर गिर पड़ीं। पिता हरिप्रसाद मजदूरी करते हैं। उसके एक भाई और बहन हैं। बहन अनारकली अरविंद को याद कर रोए जा रही थी।
सुनील की मौत के बाद उजड़ गई खुशबू की दुनिया
तीन और चार साल की दो बेटियों के पिता सुनील की पत्नी खुशबू तीन माह की गर्भवती है। हादसे की खबर सुनते ही वह अचेत हो गई। उसे महिलाओं ने होश में लाया। हादसे की जानकारी के बाद खुशबू का रोकर बुरा हाल हो गया।
वह बस एक ही रट लगाए बैठी थी कि जाते समय बोले थे कि जल्दी ही घर लौटूंगा। इधर दरवाजे पर बैठी सुनील की दोनों बेटियां मां व अन्य परिजनों को रोता देख खुद भी रोए जा रही थी। सुनील की बड़ी बेटी का नाम अनुष्का व छोटी बेटी का नाम नायरा है।
विदेश जाने की तैयारी में था प्रदीप
प्रदीप उर्फ प्रदुम्न पासपोर्ट बनवाकर खाड़ी देश जाने की तैयारी में था। छह भाइयों में सबसे अधिक जिम्मेदारी वहन करता था। वह पेंट पॉलिस का काम करता था। घर की माली हालत वही संभालता था। शनिवार को जब खबर मिली कि प्रदीप की सड़क हादसे में मौत हो गई है तो उसके भाई बहनों का रोकर बुरा हाल हो गया। तीन भाई अलग रहते हैं।