पुराने केस की समीक्षा के दौरान चार्जशीट न लगने पर एसपी सिटी की पड़ी नजर
अब तक की जांच में मिले साक्ष्यों के आधार पर केस को आगे बढ़ाएगी पुलिस
गोरखपुर। फर्जी दस्तावेजों के सहारे आईसीआईसीआई समेत कई बैंकों से करोड़ों का ऋण लेकर चूना लगाने वाले आरोपी रुद्रांश पांडेय केस की फाइल फिर खुल गई है। नगर निगम में फर्जी तरीके से नाम चढ़ाए जाने का मामला प्रकाश में आने के बाद जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था। पुराने केस की समीक्षा के दौरान चार्जशीट न लगने से एसपी सिटी की इस पर नजर पड़ गई। इसके बाद उन्होंने अब तक मिले साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
बांसगांव निवासी रुद्रांश पांडेय ने एक-एक कर तीन प्राइवेट बैंकों से करोड़ों रुपये का ऋण लिया है। इसमें आईसीआईसीआई बैंक से 4.45 करोड़ रुपये का ऋण भी शामिल है। मामले में बैंकर्मियों की ओर से रुद्रांश के खिलाफ केस दर्ज कराया गया था। पुलिस की जांच पता चला कि उसने आईसीआईसीआई के अलावा एक बैंक से 80 लाख और दूसरे से 1.20 करोड़ रुपये का ऋण लिया। जिस बैंक से उसने 80 लाख रुपये लिए और न चुकाने पर उसे काली सूची में डाला गया, वहीं पर रुद्रांश ने नया खाता भी खुलवा लिया। अभी तक दोनों बैंकों की ओर से केस दर्ज नहीं कराया गया है। जांच में जुटी पुलिस चाहती है कि आईसीआईसीआई बैंक ने जो केस दर्ज कराया है, उसी में गिरोह का पर्दाफाश कर दिया जाए। इससे एक संदेश भी जाएगा कि किसी ने इस फर्जी तरीकों से ऋण दिया तो बच नहीं पाएगा। यह जांच भी अभी बैंक तक जाकर रुकी थी। अब इसे आगे बढ़ाया जाएगा।
कोट
अब इस केस में आगे की जांच को साक्ष्यों के आधार पर तेजी से किया जाएगा। पुलिस इसमें शामिल अन्य लोगों के खिलाफ भी साक्ष्य जुटा रही है। साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
- अभिनव त्यागी, एसपी सिटी