गोरखपुर। माॅडर्न कोच फैक्टरी, रायबरेली में फिटर पद पर फर्जी नियुक्ति की जांच में नया मोड़ आ गया है। सेंट्रल विजिलेंस की टीम निलंबित चेयरमैन नुरुद्दीन अंसारी के कार्यकाल में नियुक्ति के लिए बने कुल 65 पैनल की जांच अलग से करेगी। सूत्रों की माने तो विजिलेंस टीम को पूर्व में बने पैनल में भी गड़बड़ी का शक है। वहीं, बृहस्पतिवार को गोरखपुर विजिलेंस की टीमों ने आरआरबी दफ्तर जाकर जांच-पड़ताल शुरू कर दी।
रेलवे बोर्ड ने नियुक्ति में फर्जीवाड़े की पुष्टि होने पर रेलवे भर्ती बोर्ड गोरखपुर के चेयरमैन नुरुद्दीन अंसारी और चेयरमैन के निजी सचिव रहे राम सजीवन निलंबित किए जा चुके हैं। राम सजीवन के बर्खास्तगी की कार्रवाई हो सकती है, इसके लिए उन्हें पहले मेजर चार्ज शीट देने की तैयारी है। इसके बाद जवाब लिया जाएगा। रामसजीवन के बेटे सौरभ कुमार का नाम पैनल में गलत तरीके से जोड़ा गया था। वहीं, पूर्व मुख्य कार्यालय अधीक्षक चंद्रशेखर आर्या को सेवानिवृत्त होने के बाद ग्रेच्युटी सहित सारे भुगतान हो चुके हैं इसलिए अब उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसके तहत पेंशन रोकी जा सकती है। चंद्रशेखर ने अपने बेटे राहुल प्रताप का नाम भी फर्जी तरीके से पैनल में जुड़वा दिया था।
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पहले की शिकायतों को भी अब खंगाल रहे
रेलवे विजिलेंस ने पूर्व में हुई सहायक लोको पायलट, तकनीशियन, पेंटर आदि पदों पर हुई नियुक्तियों में गड़बड़ी की शिकायतों को भी खंगालना शुरू कर दिया है। दो वर्ष पूर्व कई बार अभ्यर्थियों ने प्रतीक्षा सूची में होने के बाद भी न बुलाने और चयनित अभ्यर्थियों ने नियुक्ति के लिए पैनल में नाम भेजने का आरोप लगाया था। इसके लिए उन्होंने कार्मिक विभाग और रेलवे भर्ती बोर्ड कार्यालय में पत्रक भी सौंपा था। सूत्रों की माने तो विजिलेंस इसे भी जांच के दायरे में रखेगी।
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280 फाइलें लेकर जा चुकी है सेंट्रल विजिलेंस टीम
माॅडर्न कोच फैक्टरी, रायबरेली में फिटर पद पर फर्जी नियुक्ति की जांच करने दिल्ली से आई सेंट्रल विजिलेंस टीम 280 फाइलें लेकर मंगलवार को ले जा चुकी है। टीम ने स्थानीय स्तर पर अधिकारियों और विजिलेंस से फीड बैक लिया था। इसके बाद गोरखपुर विजिलेंस की चार टीमें बनाई गई और प्रत्येक टीम में तीन-तीन इंस्पेक्टर रखे गए हैं। ये टीमें वर्ष 2018 में कुल 1588 पदों पर भर्ती की पूरी प्रक्रिया की जांच करेगी।