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Gorakhpur News: 500 लोगों के आठ करोड़ लेकर भागी सोसाइटी, उत्तराखंड में भी दर्ज है केस- जानिए कैसे करते थे ठगी

Sun, 20 Jul 2025 12:34 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर

सार

सूत्रों ने बताया कि समीर अग्रवाल ने वर्ष 2016 में सागा नामक संस्था की स्थापना की थी, जिसमें नौ समितियां गठित की गई थीं। इनमें से एक द लोनी अर्बन मल्टी-स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (एलयूसीसी) है, जिसका कारोबार उत्तर प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड में है। बताया जा रहा है कि एलयूसीसी सोसाइटी के खिलाफ वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश के कोतवाली ललितपुर और मध्य प्रदेश में भी केस दर्ज किया गया था।
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कोऑपरेटिव सोसायटी मामले में होटल में मीटिंग लेते आरोपी बीएल गुप्ता. - फोटो : स्रोत: सोशल मीडिया
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विस्तार
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द लोनी अर्बन मल्टी स्टेट थेफ्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी में शहर के करीब 500 से ज्यादा लोगों ने निवेश किया था। इन निवेशकों के करीब आठ करोड़ रुपये लेकर सोसाइटी भाग गई है। बताया जा रहा है कि सोसाइटी के प्रबंधन से जुड़े लोगों पर उत्तराखंड में पहले से केस दर्ज है। कोतवाली पुलिस मामले की जांच कर रही है।

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जानकारी के अनुसार, यह सोसाइटी गोरखपुर में साल 2017 से सक्रिय थी। पहले इसका कार्यालय घोष कंपनी के पास था। इसके बाद अधिक लोग जुड़े तो कार्यालय एल्युमिनियम फैक्टरी के पास शिफ्ट कर दिया गया। बाद में बशारतपुर में कार्यालय खुल गया। सोसाइटी से करीब 45 एजेंट जुड़े थे जो दूसरे लोगों से निवेश करवाते थे।

बताया जा रहा है कि 2024 से पहले तक रुपये वापस भी मिले लेकिन इसके बाद भुगतान बंद हो गया। इस सोसाइटी पर उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में केस दर्ज हुआ था जिसमें पुलिस ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया था। आरोपियों ने पांच वर्ष में रुपये दोगुना करने का झांसा दिया था।

पीड़ित संजय अग्रहरि ने बताया कि नवंबर-2024 में सोसाइटी की साइट पर अपडेट मिलना बंद हो गया था। इसके बाद संस्था के पूर्वांचल हेड और शाखा प्रबंधक ने आश्वस्त किया था कि यह ठीक हो जाएगा। फरवरी में सोसाइटी के फर्जीवाड़े के बारे में पता चला।

इसके बाद कार्रवाई के लिए चक्कर काटने लगे। आईजीआरएस पर भी शिकायत की गई थी। केस के लिए वाराणसी भी गए थे लेकिन केस दर्ज नहीं हुआ। इसके बाद गोरखपुर में कोर्ट की शरण ली।

आरोपी बीएल गुप्ता, शबाब हुसैन व राघवेंद्र तिवारी. - फोटो : स्त्रोत- सोशल मीडिया
डिपॉजिट पूरा होने के बाद भी लगवा दिए रुपये
संजय ने बताया कि उन्होंने करीब 25 लाख रुपये अपने लगा दिए। परिवार से जुड़े लोगों और रिश्तेदारों के मिलाकर करीब 1.25 करोड़ रुपये इसमें डूब गए। बताया कि 2022 में कुछ डिपॉजिट पूरा हो गया था लेकिन आरोपी बाबूलाल गुप्ता और राघवेंद्र तिवारी ने दोबारा इसे निवेश करा दिया। अब ग्राहक रोज रुपये वापस मांगते हैं। इसके लिए दबाव बनाते हैं लेकिन सोसाइटी के सभी अधिकारी भाग गए हैं जवाब देते नहीं बनता।

गड़बड़ी के बाद भी किया रिन्युअल
पीड़ित अजय यादव ने बताया कि आरोपी बाबूलाल गुप्ता कंपनी का पूर्वांचल हेड था और राघवेंद्र तिवारी ब्रांच मैनेजर। बाबूलाल गुप्ता ही लोगों को झांसे में लेता था। वाराणसी में कंपनी का सारा पैसा इकट्ठा होता था। अजय का कहना है कि 2024 में गड़बड़ी की जानकारी हो गई थी लेकिन किसी को बताया नहीं। रिन्युअल करवाकर रुपये जमा करवा देते थे। वाराणसी जाकर पता किया तो वहां पहले से ही हड़कंप मचा हुआ था।

सितंबर में हुई थी अंतिम बैठक
सोसाइटी से जुड़े लोग विजय चौक स्थित होटल में महीने में तीन बार मीटिंग करते थे। इसमें बिजनेस का टारगेट देते थे। टारगेट हासिल करने पर बोनस का लालच देते थे। सितंबर-2024 में अंतिम मीटिंग हुई थी।

चार जगहों पर था एटीएम
ठगी का शिकार हुए विशाल गुप्ता ने बताया कि सोसाइटी का लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन देखकर भरोसा हो गया था। शहर में चार जगहों पर इसके एटीएम बूथ भी थे। उसमें सभी बैंकों के कार्ड लगते थे। इससे भरोसा बढ़ गया था। विशाल ने अपने पांच लाख रुपये निवेश किए थे। अन्य लोगों के करीब 50 लाख रुपये लगवाए थे। एफडी और आरडी में सारा निवेश था। बताया कि दूसरे शहरों में सेमिनार का उद्घाटन प्रशासनिक लोग करते थे।

सोसाइटी की तरफ से खोला गया एटीएम - फोटो : स्त्रोत- सोशल मीडिया
11 लोगों पर दर्ज हुआ है केस
कोतवाली थाने में सोसाइटी के प्रबंधन से जुड़े 11 लोगों पर केस दर्ज हुआ है। इसमें वाराणसी के मुरारी मिश्रा, बाबूलाल गुप्ता, राघवेंद्र तिवारी, बीएल गुप्ता, पुणे के समीर अग्रवाल, सानिया अग्रवाल, शबाब हुसैन, अनूप जैन, संजय मुद्गल, आके शेट्टी, अभय राय शामिल हैं। इसमें समीर अग्रवाल कंपनी का सीएमडी है। हालांकि, पीड़ितों का कहना है कि इसमें मुरारी मिश्रा भी पीड़ित हैं। उनके भी लाखों रुपये लेकर आरोपी भाग गए हैं।

दिए थे कूटरचित बॉन्ड और रसीद
वर्ष 2024 में निवेशकों की परिपक्वता धनराशि का समय पूरा हो गया था। इसके बाद भी रुपये नहीं मिले। आरोप है कि सोसाइटी के अधिकारियों ने बताया कि लोकसभा चुनाव के चलते कैश ब्रांच तक नहीं पहुंचाया जा रहा लिहाजा निवेशकों को भुगतान प्राप्त करने के लिए थोड़ा इंतजार करना होगा।
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नवंबर 2024 से सोसाइटी की वेबसाइट पर अपडेट मिलना बंद हो गया। एक माह बाद भी यही स्थिति रही तो शाखा प्रबंधक को जानकारी दी गई। तब उन्होंने कहा कि हम आपके और निवेशकों के रुपये के संबंध में कुछ
नहीं कर सकते। निवेशकों को कूटरचित बांड व रसीद दी गई थी।

यूपी और एमपी में भी केस
सूत्रों ने बताया कि समीर अग्रवाल ने वर्ष 2016 में सागा नामक संस्था की स्थापना की थी, जिसमें नौ समितियां गठित की गई थीं। इनमें से एक द लोनी अर्बन मल्टी-स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसाइटी (एलयूसीसी) है, जिसका कारोबार उत्तर प्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड में है। बताया जा रहा है कि एलयूसीसी सोसाइटी के खिलाफ वर्ष 2024 में उत्तर प्रदेश के कोतवाली ललितपुर और मध्य प्रदेश में भी केस दर्ज किया गया था।

मामले में केस दर्ज कर जांच की जा रही है। पीड़ित को बुलाकर उससे पूछताछ कर साक्ष्यों के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी: ओंकार दत्त तिवारी, सीओ, कोतवाली
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