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Gorakhpur News: छह महीने पहले इस फैक्टरी में बनी सॉस का नमूना हुआ था फेल

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खाद्य सुरक्षा विभाग में सेंवई, टोमैटो सॉस बनाने की फैक्टरी के तौर पर है पंजीकरण
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गोरखपुर। गीडा इलाके में जिस टोटल फास्ट फूड लिमिटेड फैक्टरी में बुधवार शाम धमाका हुआ, उसकी खाद्य सुरक्षा विभाग ने भी जांच की। इस फैक्टरी में बीते अक्तूबर में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने छापा मारकर आठ सैंपल लिए थे। जांच में सॉस का नमूना भी फेल हुआ था। उस मामले में दो केस भी दर्ज कराए गए थे।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने अक्तूबर में जब मिलावट के खिलाफ जांच अभियान शुरू किया तो पता लगा कि गीडा में एक फैक्टरी में टोमैटो सॉस, नूडल्स और सेवई आदि बनाने का काम होता है, लेकिन मानकों का पालन नहीं होता। इस पर सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा डॉ. सुधीर कुमार सिंह की अगुवाई में टीम ने छानबीन की थी। सॉस, नूडल्स और सेंवई के आठ नमूने लिए थे जिसमें सॉस के दो नमूने फेल हुए थे, जिस पर केस भी दर्ज कराया गया था। सहायक आयुक्त डॉ. सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि उस वक्त फैक्टरी संचालक को निर्देश दिए गए थे कि सुरक्षा और सफाई समेत सभी मानकों का पालन कराया जाए।
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बुधवार को हुए धमाके के बाद पहुंचे खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि सेवई व अन्य नूडल्स को सुखाने के लिए एक कमरे में पहले दो तरफ से एग्जास्ट फैन लगाए गए थे। एक तरफ से हवा जाती थी और दूसरे तरफ से निकलती थी, जिससे कमरे में नूडल्स जल्दी सूखते हैं। अनुमान लगाया जा रहा है कि नूडल्स को जल्दी सुखाने और पानी गर्म करने के लिए बाद यहां गीजर भी लगाया गया था। यह गीजर ही ओवरहीट होकर ब्लास्ट हुआ होगा। हालांकि जांच करने गए अफसरों को मौके पर कोई लोहे का टुकड़ा आदि नहीं मिला।

एडीएम प्रशासन ने शुरू की जांच
गोरखपुर। विस्फोट में झुलसे मजदूरों का हाल जानने बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहुंचे डीएम कृष्णा करुणेश ने एडीएम प्रशासन पुरुषोत्तम गुप्ता को पूरे प्रकरण की जांच कर 24 घंटे के अंदर रिपोर्ट देने के निर्देश दिए। डीएम ने बताया कि डॉक्टरों से बात की गई। ऐसा लग रहा है कि सभी मजदूर आग की लपटों में घिरकर झुलसे हैं। फैक्टरी में किस ज्वलनशील पदार्थ का इस्तेमाल हो रहा था और धमाका किस वजह से हुआ, इन सभी बिंदुओं पर जांच कराई जा रही है। डीएम के आदेश के बाद देर शाम एडीएम प्रशासन ने घटनास्थल पहुंचकर निरीक्षण किया।
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95 प्रतिशत से अधिक झुलसे हैं दो मजदूर
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. रामकुमार सिंह ने बताया कि हादसे में झुलसे सातों मजदूरों को इमरजेंसी वार्ड में प्राथमिक उपचार के बाद बर्न वार्ड में रेफर कर दिया गया। इनमें दो लोग 95 प्रतिशत से अधिक झुलसे हैं, उनकी हालत अत्यंत चिंताजनक है। वहीं दो लोग 35 से 40 फीसदी तक झुलसे हुए थे। सभी सातों को उच्च प्राथमिकता वाली निगरानी में रखा गया है।
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