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Gorakhpur News: भाई से विवाद के बाद तनाव में थे सुरक्षाकर्मी...सुसाइड नोट में बयां किया दर्द

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सीओ की मौजूदगी में एयरपोर्ट पर घटना स्थल की जांच करती फॉरेसिक टीम।
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तीन अगस्त को परिवार को गांव में छोड़कर शहर लौटे थे जितेंद्र सिंह
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गोरखपुर। एयरफोर्स पर सुरक्षा में तैनात डीएससी के सुरक्षाकर्मी जितेंद्र सिंह ने खुद को गोली मारने से पहले एक सुसाइड नोट लिखा था। इसमें उसने अपना दर्द बयां किया। नोट में लिखा कि पारिवारिक कलह की वजह से उसने ऐसा कदम उठाया। भाई से अक्सर विवाद से वह तनाव में थे।
मृतक जितेंद्र चार भाइयों में तीसरे नंबर के थे। वह पत्नी, दो बेटियों व एक बेटे के साथ एयरफोर्स के विजय विहार कॉलोनी में रहते थे। बताया जा रहा है कि कुछ दिन पहले वह पूरे परिवार संग गांव पर सावन में होने वाली पूजा में शामिल होने गए थे। बीते तीन अगस्त को वह वापस शहर आकर ड्यूटी जॉइन कर लिए थे। पत्नी व बच्चे गांव में ही रुक गए थे।
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सीओ कैंट योगेंद्र सिंह ने बताया कि बुधवार रात वह अपने दो अन्य साथियों के साथ रनवे के पास ड्यूटी पर थे। उसी दौरान जितेंद्र ने खुद को गोली मार ली। साथियों का कहना है कि कूलर की आवाज इतनी तेज थी कि उनको गोली की आवाज सुनाई नहीं थी। जितेंद्र के रिलीवर जब ड्यूटी के लिए पहुंचे तो देखा कि वह जमीन पर गिरा पड़े हैं। पेट में बाएं तरफ गोली लगी है। मोबाइल फोन कैंप में था। वहीं पर एक सुसाइड नोट भी मिला। करीब छह लाइन के नोट में उन्होंने लिखा है कि भाइयों से अक्सर विवाद से तंग आ गया हूं। एक भाई के फर्जी केस लिखवाने के कारण जीना मुहाल हो गया है। अब और बर्दाश्त नहीं कर सकता। फॉरेंसिक टीम ने मौके से सुसाइड नोट, राइफल, खून से सने कपड़े व मोबाइल कब्जे में ले लिया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद सौंपी जाएगी।

शाम करीब 6:10 बजे पर पहुंचा सुरक्षा कर्मी का परिवार
सहकर्मियों ने जब जितेंद्र के सुसाइड के बारे में पत्नी को जानकारी दी तो घर में कोहराम मच गया। सूचना के बाद शाम 6.10 बजे जितेंद्र का परिवार एयरपोर्ट पहुंचा। जहां अधिकारियों और साथ ड्यूटी पर रहे सुरक्षाकर्मियों से जानकारी हासिल की। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में एक्स हॉस्पिटल पहुंचे। जहां पोस्टमार्टम के लिए शव आया हुआ था। करीब चार घंटे तक चले पोस्टमार्टम के बाद जितेंद्र का शव लेकर उसके चाचा और परिवार के अन्य लोग एयरफोर्स हॉस्पिटल चले गए। इस दौरान उन्होंने कुछ भी बात करने से इन्कार कर दिया।
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शांत और अनुशासित स्वभाव के थे जितेंद्र
जितेंद्र के साथियों ने बताया कि वह शांत और अनुशासित स्वभाव के माने जाते थे। भाई से प्रताड़ित होने के बाद भी उनके चेहरे पर कोई शिकन नहीं था। यहीं कारण था कि साथ ड्यूटी पर तैनात सुरक्षा कर्मी भी भांप नहींं सके।
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