शहर से ज्यादा ग्रामीण क्षेत्रों में हुआ कार्बाइड गन का इस्तेमाल, किसी ने जलाया हाथ तो किसी का झुलसा चेहरा
दिवाली से पहले इंस्टाग्राम पर खूब वायरल रही कार्बाइड गन की रील, बताए जा रहे थे बनाने के तरीके
200 से 350 रुपये के खर्च में तैयार हो जा रही थी कार्बाइड गन, अब करा रहे इलाज
गोरखपुर। इंस्टाग्राम पर वायरल कार्बाइड गन की रील ने कई युवाओं की जान को जोखिम में डाल दिया। हार्डवेयर की दुकान से साधारण पीवीसी पाइप, सुलेशन और कार्बाइड का प्रयोग कर युवाओं ने कार्बाइड गन बना ली। इसके बाद दिवाली पर जमकर धमाके किए लेकिन बिना सोचे समझे इस्तेमाल की गई इस देसी बंदूक से निकलने वाली खतरनाक एसिटिलीन गैस ने 25 से अधिक लोगों को जख्मी कर दिया। किसी ने हाथ जला लिए तो किसी ने चेहरा झुलसा लिया। इनमें पांच की हालत गंभीर बनी हुई है, जिनका एम्स में इलाज चल रहा है।
दरअसल, दिवाली से पहले इंस्टाग्राम पर एक रील बहुत वायरल हो रही थी। इसमें पीवीसी पाइप, लाइटर और कार्बाइड की मदद से एक ऐसी बंदूक बनाई गई थी जिससे काफी तेज आवाज आ रही थी। धीरे-धीरे इस तरह की रील खूब वायरल होने लगी। लोगों ने बंदूक बनाने का तरीका भी बता दिया। इसे देख ग्रामीण इलाकों में बहुत सारे युवकों ने यह बंदूक बनाई।
सिकरीगंज के विशाल निषाद ने बताया कि वायरल रील देखकर एक स्थानीय हार्डवेयर की दुकान से चार इंच व दो इंच की पीवीसी पाइप खरीदी। घर पर ही कार्बाइड डालकर गन बना ली। इससे फायर करने पर आवाज काफी तेज आ रही थी। लागत भी बहुत कम थी लेकिन एक बार गैस ज्यादा होने की वजह से हाथ झुलस गया।
चौरीचौरा इलाके के रवि कुमार ने बताया कि उसने इस तरह की गन बनाकर कई युवकों को दी। एक गन बनाने में 200 से 350 रुपये तक का खर्च आया। सभी ने दिवाली पर खूब धमाका किया। कुछ युवकों ने इसका इस्तेमाल करने में थोड़ी लापरवाही बरती जिससे हाथ जल गया।
एम्स, जिला अस्पताल और निजी अस्पतालों में उपचार करवा रहे प्रभावितों ने बताया कि धमाका या गरम गैस के प्रभाव से त्वचा और मांसपेशियों को जलन व जले के निशान आए हैं। कुछ के चेहरे पर भी गंभीर जलन के दाग बने हैं। इलाज कर रहे चिकित्सक ने चेतावनी दी है कि अनियंत्रित कार्बाइड गन से नेत्रों, चेहरे और ऊपरी अंगों को स्थायी क्षति भी हो सकती है।
दिवाली के पहले खूब बिकी कार्बाइड गन
दिवाली से एक सप्ताह पहले से कार्बाइड गन शहर के नखास, डीवी स्कूल बेनीगंज समेत कई इलाकों में बिकती रही। तीन से चार सौ रुपये तक इसकी बिक्री हुई। वहीं, ग्रामीण इलाकों में युवकों ने कार्बाइड गन बनाकर जमकर आतिशबाजी की लेकिन बिन सोचे समझे इस्तेमाल की गई गन से निकली खतरनाक गैस के शिकार हो गए।
गहरा घाव बना देती है एसिटिलीन गैस
चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि एसिटिलीन एक ज्वलनशील गैस है, जिसका वैज्ञानिक नाम सी2 एच2 है। यह कैल्शियम कार्बाइड में पानी डालने से बनती है। इसका प्रयोग वेल्डिंग या औद्योगिक कामों में किया जाता है। इसके अलावा इसका प्रयोग बड़ी संख्या में केला, आम व अन्य फलों को पकाने में किया जाता है। यह गैस काफी खतरनाक है और जलने के बाद गहरा घाव बन जाता है। लोगों को इस तरह के पटाखे का प्रयोग नहीं करना चाहिए।