दिग्विजयनगर के पार्षद ऋषि मोहन वर्मा ने जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र में देरी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रमाणपत्र जारी होने में दो से तीन महीने लग जा रहे हैं। निगम में आने के बाद पता चलता है कि आवेदन तहसील में लंबित है। तहसील जाने पर वहां से कोई जानकारी ही नहीं मिलती। इस पर हंगामा शुरू हो गया। मेयर ने इसके लिए डीएम और कमिश्नर से बातकर जल्द प्रमाणपत्र निर्गत कराने का आश्वासन दिया, तब जाकर पार्षद शांत हुए।
नगर निगम बोर्ड की बैठक में सोमवार को जमकर हंगामा हुआ। जन्म प्रमाणपत्र बनाने में दो से तीन महीने लगने और चढ़ावा लेकर तत्काल बनाने का आरोप लगाते हुए भाजपा और सपा पार्षदों ने जमकर हल्ला मचाया। एक घंटे तक माहौल गरम रहा। मेयर ने इसके लिए डीएम और कमिश्नर से बातकर जल्द प्रमाणपत्र निर्गत कराने का आश्वासन दिया, तब जाकर पार्षद शांत हुए।
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इसी बीच सदन की कार्रवाई को कार्यवृत्ति में बदलकर प्रस्तुत करने का आरोप लगाकर बसंतपुर के पार्षद बिजेंद्र अग्रहरि सदन हाॅल में धरने पर बैठ गए। उनके समर्थन करीब 25 पार्षद के आने से माहौल फिर गरमा गया। नगर आयुक्त के आश्वासन पर धरने से वापस अपनी कुर्सी पर बैठे।
कार्यकारिणी की बैठक में हंगामे के दौरान पार्षद
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
नगर निगम बोर्ड की बैठक में सातवीं और आठवीं बैठक के कार्यवाही की पुष्टि और छठवीं बैठक की अनुपालन आख्या को मंजूरी के बाद जैसे ही कार्रवाई आगे बढ़ी सदन का माहौल गरम हो गया। दिग्विजयनगर के पार्षद ऋषि मोहन वर्मा ने जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र में देरी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रमाणपत्र जारी होने में दो से तीन महीने लग जा रहे हैं। निगम में आने के बाद पता चलता है कि आवेदन तहसील में लंबित है। तहसील जाने पर वहां से कोई जानकारी ही नहीं मिलती।
उन्होंने कहा कि आवेदन नगर निगम में जमा होता है और प्रमाणपत्र यहीं से जारी होते हैं, इसलिए जिम्मेदारी भी नगर निगम की बनती है। इस पर जवाब देते हुए अपर नगर आयुक्त शिव पूजन यादव ने कहा कि देरी नगर निगम से नहीं, बल्कि तहसील से हाेती है। इस पर बेतियाहाता पार्षद विश्वजीत त्रिपाठी ने आरोप लगाया कि किसी भी आम आवेदक का प्रमाणपत्र जारी होने में महीनों लग जाते हैं, लेकिन सुविधा शुल्क देने पर दो से तीन दिनों में प्रमाणपत्र मिल जाता है।
शिवजी नगर के पार्षद सौरभ विश्वकर्मा ने कहा कि 1500 रुपये देकर वह खुद अपने वार्ड के लोगों का प्रमाणपत्र सात से दस दिन में बनवा देते हैं। घंटाघर के पार्षद जियाउल इस्लाम ने कहा कि यदि निगम इस समस्या का समाधान नहीं करता है तो जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनाने का अधिकार डीएम को दे देना चाहिए। इसके समर्थन में 20 से 25 पार्षद अपनी जगह पर खड़े हो गए और शोर मचाने लगे।
कार्यकारिणी की बैठक में हंगामे के दौरान पार्षद
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
करीब आधे घंटे तक चली बहस के बाद नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने आंकड़ों के साथ जवाब देना शुरू किया। कहा कि वर्तमान में जन्म-मृत्यु के 1145 आवेदन एक महीने से लंबित हैं। 733 का निस्तारण हो गया है। 231 नगर निगम के पास, जबकि 1480 तहसील कार्यालय के पास लंबित हैं।
उन्होंने कहा कि सीआरएस पोर्टल की वजह से थोड़ी परेशानी हो रही है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र समय से जारी नहीं हो पा रहे। इसको लेकर अधिकारियों से बात हो चुकी है। वह और मेयर डाॅ. मंगलेश श्रीवास्तव एक बार फिर कमिश्नर और डीएम से बात करेंगे। सुविधा शुल्क की बात पर उन्होंने जवाब दिया कि यदि कोई कर्मचारी सुविधा शुल्क लेता है तो पार्षद सदन में ही उनका नाम बताएं, यहीं पर उनके निलंबन का आदेश जारी कर दिया जाएगा।
हर सवाल का एक ही जवाब
जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र को लेकर धरने पर बैठे पार्षद बिजेंद्र अग्रहरि ने आरोप लगाया कि अनुपालन आख्या में हर पार्षद के सवाल के जवाब में एक ही जवाब लिखा जाता है- ''''नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी''''। जबकि नगर निगम के प्रस्तावाें को स्वीकृति मिल जाती है।
नगर आयुक्त ने इसका जवाब दिया तो पार्षद ने कहा कि जबरन उनकी आवाज दबाई जा रही है। करीब 15 मिनट बाद कुछ पार्षद उनके पास गए और नगर आयुक्त के आश्वासन पर धरने से वापस अपनी कुर्सी पर बैठे।
जोनल कार्यालय के निर्धारण में गड़बड़ी का मुद्दा उठा
वार्ड 79 सिविल लाइंस प्रथम के पार्षद अजय राय ने जोनल कार्यालय के निर्धारण में हुई गड़बड़ी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कुछ जोन में शामिल वार्ड की दूरी बहुत अधिक है। लोगों को परेशानी होती है। नगर आयुक्त ने बताया कि इसपर पार्षदों की कमेटी बनाकर समीक्षा की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि नजदीक के वार्ड के नाम ही संबंधित जोन में रखे जाएं।
वार्ड 61 के पार्षद शहाब अंसारी ने वार्ड में कूड़ा पड़ाव घर और जर्जर सामुदायिक शौचालय से हो रही दिक्कत का मुद्दा उठाया। इसपर नगर आयुक्त ने बताया कि इसी महीने चरगांवा का गारबेज ट्रांसफर स्टेशन शुरू हो जाएगा जिसके बाद बाकी बचे सभी कूड़ा पड़ाव घर तोड़ दिए जाएंगे। बसंतपुर पार्षद बिजेंद्र अग्रहरि ने अपने वार्ड में बने गारबेज ट्रांसफर स्टेशन का भी मुद्दा उठाया। कहा कि स्टेशन से आने वाली बदबू से लोग परेशान हैं।
कार्यकारिणी की बैठक में हंगामे के दौरान पार्षद
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शहीदों, सेवानिवृत्त जवानों से न लें संपत्ति कर
वार्ड 35 सालिकरामनगर की पार्षद सरिता यादव ने मांग की कि देश के लिए शहीद जवानों के परिवार व सेवानिवृत्त जवानों से संपत्ति कर नहीं लिया जाए। इनके प्रस्ताव पर नगर आयुक्त ने विचार का आश्वासन दिया। शिवजी नगर के पार्षद सौरभ विश्वकर्मा ने नगर निगम के नवीन भवन में वाई-फाई लगाने की मांग की।
महेसरा में बनेगा ई-चार्जिंग स्टेशन
गोरखपुर सिटी ट्रांसपोर्ट्स सर्विसेज लिमिटेड सिविल लाइंस को पांच वर्षों के लिए मौजा हुमायूपुर, तप्पा-कस्बा परगना-हवेली तहसील सदर में 1000 वर्ग मीटर जमीन दिए जाने का निर्णय वापस ले लिया गया। कार्यकारिणी समिति की बैठक में इस जमीन को ई-ऑटो चार्जिंग स्टेशन के लिए देने की मंजूरी दी गई थी, लेकिन निगम सदन की बैठक में वरिष्ठ पार्षद जिलाउल इस्लाम ने कहा कि जमीन बक्फ बोर्ड की है।
निगम सिर्फ उसका रखरखाव कर सकता है। निर्धारित अवधि के लिए भी किसी को दे नहीं सकता। इसके बाद ई-ऑटो चार्जिंग स्टेशन के लिए महेसरा में जमीन दिए जाने का निर्णय लिया गया।
शासन में जाएगा डीडीयू के ब्याज माफी का प्रस्ताव
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के कुलसचिव ने 28 सितंबर को नगर आयुक्त को पत्र लिख कर ब्याज माफ करने की मांग की थी। डीडीयू पर वित्तीय वर्ष 2024-25 में बकाया संपत्ति कर का मसला भी सदन की बैठक में उठा। संपत्तिकर के मद में 7,65,55,854 रुपये मूल धन था, जिस पर 1,96,43,076 रुपये ब्याज मिला कर कुल 9,61,98,930 रुपये संपत्ति कर जमा करना था।
नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल की ओर से लाए गए इस प्रस्ताव को निगम सदन की बैठक में शासन को भेजने का फैसला लिया गया।
ये निर्णय भी हुए
सुभाष चंद्र बोस नगर में एमआरएफ सेंटर के पश्चिम तरफ पीछे की खाली जमीन पर चंडिकादास अमृतराव देशमुख ‘नानाजी देशमुख’ पार्क बनाया जाएगा। पार्क के लिए जमीन चिह्नित करने एवं नामकरण के लिए उप समिति का गठन तीन फरवरी की कार्यकारिणी की बैठक में किया गया था। इसके अलावा मकर संक्रांति पर्व पर गोरखनाथ मंदिर परिसर में अलाव के लिए जलौनी लकड़ी की आपूर्ति के लिए 29.80 लाख रुपये और शीत ऋतु में महानगर गोरखपुर में विभिन्न वार्डों में अलाव जलाने के लिए लकड़ी की आपूर्ति के लिए 29.80 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई।