आईवीआरआई की टीम ने किया सभी जानवरों का हेल्थ ऑडिट, नहीं मिला डिहाईड्रेशन
तीन से चार दिनों में मिलेगी सभी वन्यजीवों की रिपोर्ट
गोरखपुर। चिड़ियाघर में जंगल से रेस्क्यू कर आए जानवरों में बीमारी के शुरूआती लक्षण नहीं दिख रहे। अंतिम समय में उनकी हालत बिगड़ने पर इलाज शुरू हो रहा लेकिन नहीं बच रहे। आईवीआरआई (इंडियन वेटनेरी रिसर्च इंस्टीट्यूट), बरेली की टीम ने चिड़ियाघर के वन्यजीवों का हेल्थ ऑडिट पूरा कर लिया है। शुरूआती जांच में सभी जनवर स्वस्थ मिले हैं। विस्तृत रिपोर्ट अगले कुछ दिनों में चिड़ियाघर प्रशासन को उपलब्ध हो जाएगी।
आईवीआरआई की टीम ने जांच में पाया कि जिन जानवरों ने अपना ज्यादातर समय चिड़ियाघर में बिताया है उनमें बीमारी के लक्षण पहले मिल जाते हैं जिससे उनका इलाज हो सकता है। पटौदी के साथ ऐसा ही हुआ। वहीं, जंगल से रेस्क्यू कर लाए गए वन्यजीव बीमारी का लक्षण नहीं दिखाते जिससे इसकी पहचान जल्दी नहीं हो पाती। बाघिन शक्ति और भेड़िया भैरवी की मौत एक ही तरीके से हुई थी। भैरवी को डिहाईड्रेशन और हार्ट अटैक आया था। वहीं, शक्ति को भी डिहाईड्रेशन और मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर हो गया था। ऐसे में उनका विसरा नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिसीजेज, भोपाल भेजा गया है जिससे इंफेक्शन की जानकारी हो सके। दूसरे जानवरों में कोई इंफेक्शन न फैले इसके लिए पूरे चिड़ियाघर परिसर को सैनीटाइज करवाया गया है।
आईवाआरआई की टीम ने शुक्रवार को सभी जानवरों के बाड़े में जाकर उनकी जांच की। उनकी स्वास्थ्य की जांच के साथ ही कीपरों से जानवरों की गतिविधियों की जानकारी ली। हालांकि, इसमें प्रथम दृष्टया सभी जानवर स्वस्थ नजर आए। किसी में डिहाईड्रेशन की समस्या नजर नहीं आई।