आरएमआरसी का सातवां स्थापना दिवस : आईसीएमआर की अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. संघमित्रा ने बताई इस केंद्र की उपलब्धियां
गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज स्थित आईसीएमआर के क्षेत्रीय चिकित्सा अनुसंधान केंद्र (आरएमआरसी) का उच्चीकरण होगा। इसके लिए आईसीएमआर ने स्वास्थ्य मंत्रालय को प्रस्ताव भेज दिया है। प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद आरएमआरसी में अनुसंधान के लिए पहले से अधिक संसाधन उपलब्ध होंगे। इससे पूर्वांचल और सटे बिहार में बीमारियों के शोध में मदद मिलेगी।
यह जानकारी मंगलवार को आरएमआरसी के स्थापना दिवस समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित करते हुए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की अतिरिक्त महानिदेशक डॉ. संघमित्रा पाती ने कहीं। उन्होंने कहा कि आरएमआरसी की गोरखपुर इकाई पूर्वी यूपी के अलावा पश्चिमी बिहार में बीमारियों के कारणों की पड़ताल कर रहा है। यह आईसीएमआर की सबसे नवीनतम ब्रांच हैं। इसे इंसेफेलाइटिस व दूसरी बीमारियों के कारणों की पहचान व शोध के लिए स्थापित किया गया था। आरएमआरसी स्थानीय बीमारियों की पहचान के साथ ही कैंसर, शिशु मृत्यदर, एनीमिया, ओबेसिटी सहित अन्य पर काम कर रहा है। उम्मीद है कि आने वाले वर्षों में यह केंद्र स्वास्थ्य अनुसंधान के क्षेत्र में और भी बड़ी उपलब्धियां हासिल करेगा।
आरएमआरसी के निदेशक प्रो. हरिशंकर जोशी ने कहा कि बीते सात वर्षों में जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) और एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (एईएस) जैसी बीमारियों के पहचान और नियंत्रण के मामले में इस संस्थान ने कई उपलब्धियां हासिल की हैं। यहां की टीम संक्रामक और गैर-संक्रामक बीमारियों पर महत्वपूर्ण शोध कर रही हैं। इसके साथ ही वैक्सीन से जुड़ा शोध, ग्रामीण स्वास्थ्य अनुसंधान इकाई (एमआरएचआरयू) की गतिविधियां, संक्रामक और गैर-संक्रामक रोगों से जुड़ी परियोजनाओं सहित अन्य पर कार्य चल रहा है।
कार्यक्रम में गोरखपुर व आसपास के विभिन्न संस्थानों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने शिरकत की। स्थापना दिवस समारोह के अंतर्गत आयोजित हुए विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कार और पदक देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर डॉ. अशोक पांडेय, डॉ. गौरवराज द्विवेदी, डॉ. राजीव सिंह, डॉ. नलिनी मिश्रा, डॉ. बीआर मिश्रा, डॉ. आयुष मिश्रा, डॉ. नेहा श्रीवास्तव और अजय नायक आदि मौजूद रहे।