राज्यपाल की स्वीकृति के बाद पहली अधिसूचना जारी
दोनों स्थलों पर नोटिस चस्पा कर 30 दिन के अंदर मांगी गई आपत्ति
गोरखपुर। रीड साहब धर्मशाला और बसंत सराय को संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है। राज्यपाल की स्वीकृति के बाद उत्तर प्रदेश सरकार के संस्कृति अनुभाग ने इसकी पहली अधिसूचना जारी कर दी है। दोनों स्थलों पर नोटिस चस्पा कर 30 दिनों के अंदर आपत्तियां मांगी गई हैं। आपत्तियों की सुनवाई के बाद अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी।
अधिसूचना के अनुसार, तहसील सदर में मौजा बसंतपुर खास, परगना हवेली स्थित बसंत सराय (रैन बसेरा) को स्मारक घोषित करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। बसंत सराय राजस्व गाटा संख्या 435, 436 और 438 में क्रमश: 0.110, 0.262 और 0.118 हेक्टेयर में स्थित है। इसके अलावा तहसील सदर मौजा अलहदादपुर परगना हवेली में रीड साहब धर्मशाला स्मारक घोषित होगा।
यह इमारत राजस्व गाटा संख्या 42 और 43 में क्रमश: 0.224 और 0.395 हेक्टेयर रकबा में स्थित है। 17 जनवरी को जारी अधिसूचना को कमिश्नर अनिल ढींगरा की सहमति के बाद पांच फरवरी को दोनों ही ऐतिहासिक स्मारकों पर नोटिस चस्पा किया। इसमें लिखा है कि नोटिस चस्पा होने के एक माह के भीतर प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश शासन संस्कृति विभाग एवं निदेशक उत्तर प्रदेश राज्य पुरातत्व विभाग में आपत्ति दाखिल कर सकते हैं।
विरासत के रूप में होगा संरक्षित
दोनों स्थलों के लिए आई आपत्तियों की सुनवाई के बाद अंतिम अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। इसके बाद यहां रह रहे लोगों को जगह छोड़नी होगी। इसके बाद इन्हें विरासत के रूप में संरक्षित किया जाएगा। इनके ऐतिहासिक महत्व को बरकरार रखते हुए इमारत का जीर्णोद्धार किया जाएगा। अपर नगर आयुक्त निरंकार सिंह ने बताया कि नगर निगम के स्वामित्व वाली पुरातात्विक महत्व की अंग्रेजों की जमाने की इन इमारतों के अनुरक्षण के लिए पुरातत्व विभाग को छह माह पहले पत्र लिखा गया था। इसमें कहा गया था कि इनका संरक्षण कराना आवश्यक है।
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वर्जन
बसंत सराय और रीड साहब धर्मशाला को संरक्षित स्मारक घोषित कर आपत्तियां मांगी गई हैं। आपत्तियों की सुनवाई के बाद अंतिम अधिसूचना जारी होगी। इसके बाद जिला प्रशासन के निर्देशानुसार उसे संरक्षित करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
- राम विनय, प्रभारी, क्षेत्रीय पुरातत्व कार्यालय, गोरखपुर