गोरखपुर। पीडब्ल्यूडी की ओर से विभिन्न नियम बनाकर समस्या उत्पन्न करने की बात कहते हुए ठेकेदारों ने कार्य बहिष्कार शुरू किया है। ठेकेदारों ने छह सूत्रीय मांग पत्र शासन को भेजकर परेशानियों को दूर करने की मांग की है। ठेकेदार संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि उनकी समस्याओं के समाधान में लापरवाही हो रही है। हालांकि ठेकेदारों के पक्ष में 12 से अधिक विधायकों और अन्य पदाधिकारियों ने प्रदेश सरकार सहित अन्य अधिकारियों को पत्र लिखकर मांग को जायज बताते हुए कार्यवाही करने को कहा है।
उत्तर प्रदेश ठेकेदार कल्याण समिति के कार्यवाहक अध्यक्ष शरद सिंह की ओर से प्रमुख सचिव को पत्र देकर बीते कई वर्षों से लोक निर्माण विभाग के बनाए जा रहे नियमों को जन उपयोगी होने के बजाय जन विरोधी बताया है। उनका आरोप है कि सारी जिम्मेदारी ठेकेदारों को सौंपकर विभाग अपनी जिम्मेदारी से बच रहा है। उन्होंने नई अनुरक्षण व्यवस्था के नए नियम, रायल्टी की गड़बड़ी, कोषागार प्रणाली के भुगतान, निविदाओं के आमंत्रण में 2 प्रतिशत जमानत धनराशि के स्थान पर 10 प्रतिशत जमानत धनराशि लेने, शिड्यूल ऑफ रेट के रिवाइज होने और ग्रामीण मार्गों पर ढुलाई में आ रही दुश्वारियों का जिक्र करते हुए इनके समाधान की मांग की है। ठेकेदार पदाधिकारियों का कहना है कि सड़कों के पांच साल का अनुरक्षण प्रदेश में संभव नहीं है। पुरानी सड़कों के लोड का हवाला देते हुए जलभराव रोकने के लिए नाली का निर्माण, सड़कों की मोटाई बढ़ाने सहित छह सूत्रीय मांगें रखी गई, जिस पर पीडब्ल्यूडी के अधिकारी संज्ञान नहीं ले रहे हैं। इसलिए ठेकेदार जनप्रतिनिधियों से समर्थन जुटा रहे हैं। शरद सिंह ने बताया कि प्रमुख अभियंता एवं सलाहकार से वार्ता के बाद मुख्यालय के घेराव को टाल दिया गया है। लेकिन उनकी मांगों पर विचार नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।