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पीएनबी घोटाला: ब्रांच मैनेजर से लेकर चपरासी तक आरोपी

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विकास भवन शाखा में खाता खोलकर रुपये निकाल लेने का आरोप
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गोरखपुर। पीएनबी के विकास भवन शाखा में वर्ष 2017 के जिस घोटाले को लेकर सीबीआई और ईडी ने कार्रवाई की है, उसमें 52 लोग आरोपी हैं। इसमें ब्रांच के मैनेजर से लेकर चपरासी तक शामिल हैं। इनके खिलाफ आरोप है कि छात्रवृत्ति और विधवा पेंशन जैसी धनराशि भी संबंधित ब्रांच में ट्रांसफर करने के बजाय अपने ही ब्रांच में डमी खाता खोलकर निकाल लिया गया।
मामले को मार्च 2017 में पकड़ा गया। इसके बाद गोरखपुर सर्किल के चीफ मैनेजर आरके श्रीवास्तव ने तत्कालीन ब्रांच मैनेजर श्याम नंदन चौबे, ब्रांच में दूसरे नंबर के मैनेजर व लोन अफसर प्रदीप कुमार जायसवाल और ओमप्रकाश मल्ल व हेड कैशियर राजेंद्र, चपरासी अरविंद कुमार व अन्य के खिलाफ केस दर्ज कराया।
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सीबीआई ने 31 मार्च 2017 को केस दर्ज कर जांच शुरू की। ब्रांच मैनेजर श्यामनंदन चौबे यहां वर्ष 2011 से 2015 के बीच मैनेजर रहे। उसी दौरान विधवा पेंशन, वृद्धा पेंशन, छात्रवृत्ति और दिव्यांग पेंशन जैसी समाज कल्याण की योजनाओं का पैसा निकाला गया। सीबीआई की जांच में यह बात सामने आई कि जिस धनराशि को केवल एक बैंक से दूसरे बैंक शाखा में ट्रांसफर किया जा सकता था, उसे भी चेक के माध्यम से भुगतान कर दिया गया।

बिना मांगे ही दिए लोन, निकाल ली गई रकम
ब्रांच मैनेजर और अन्य कर्मियों के सहयोग से कई संस्थाओं को बिना मांगे ही लाखों रुपये के लोन न केवल स्वीकृत किए गए, बल्कि उनके खाते में रकम ट्रांसफर कर उसे भी निकाल लिया गया। एक तेल मिल के प्रोपराइटर ने पुत्र के नाम पर खाता खोला, लेकिन नाम भाई का लिखा। उससे संबंधित रिकाॅर्ड की बिना जांच किए ही लोन भी दे दिया गया। इतना ही नहीं, जांच में यह भी पता चला कि यह ज्वाइंट खाता था, जिसका संचालन एक ही व्यक्ति कर रहा था। इस दौरान करीब चार करोड़ के लोग दूसरों के नाम पर फर्जी तरीके से कमीशन के चक्कर में निकाले गए।
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पंचायतीराज कर्मचारी की पत्नी के खाते में भेजे रुपये
इस मामले में एक सरकारी कर्मचारी भी आरोपी है। इस सरकारी कर्मचारी की पत्नी ने एक कंपनी बनाकर लोन के लिए आवेदन किया। इस पर ब्रांच मैनेजर ने बिना किसी सक्षम अफसर से अनुमति लिए ही सरकारी योजनाओं के करीब 58 लाख रुपये इस संस्था के खाते में भेज दिया। रुपये किस लिए भेजे गए, इसका कोई डिटेल भी नहीं दिया गया। संस्था ने इस रुपये से ग्राम पंचायतों के लिए फागिंग मशीन खरीदने के साथ ही अधिकांश नकदी निकाल ली।

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