फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Gorakhpur News: खोराबार मेडिसिटी योजना में प्लॉट खाली...बेतियाहाता में रोजाना लग रहा जाम

विज्ञापन
विज्ञापन
शहर में जम चुकी प्रैक्टिस छोड़कर बाहर नहीं जाना चाहते डॉक्टर
विज्ञापन

मेडिसिटी में 90 प्लाटों में से अब तक 39 का ही आवंटन
बचे हुए प्लाटों के लिए 28 फरवरी तक होगा पंजीकरण, चार मार्च को होगा आवंटन
गोरखपुर। शहर को जाम से निजात दिलाने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्र व पड़ोस के जिलों से आए मरीजों को एक ही जगह उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं दिलाने के लिए बनी खोराबार मेडिसिटी योजना में डॉक्टर रुचि नहीं दिखा रहे हैं। इसके पीछे वजह यह बताई जा रही है कि डॉक्टर शहर में जम चुकी अपनी प्रैक्टिस छोड़कर बाहर नहीं जाना चाहते। स्थिति यह है कि अभी तक 90 में से केवल 39 प्लॉट ही आवंटित हो पाए हैं।
इसमें भी लैब के लिए प्रस्तावित 11 में से केवल एक प्लॉट ही आवंटित हुआ है। अब फिर से जीडीए ने पंजीकरण का मौका दिया है। 28 फरवरी तक इस योजना के तहत पंजीकरण होगा। 4 मार्च को इसका ड्राॅ निकाला जाएगा।
विज्ञापन

देवरिया रोड पर खोराबार में जीडीए (गोरखपुर विकास प्राधिकरण) की तरफ से टाउनशिप एवं मेडिसिटी योजना लांच की गई थी। यहां अस्पताल के लिए 45, क्लीनिक के लिए 34 और लैब के लिए 11 प्लॉट हैं। अभी तक इसमें से अस्पताल के लिए 26, क्लीनिक के लिए 12 और लैब के लिए एक प्लॉट का आवंटन हुआ है।



बता दें कि शहर में आईएमए से पंजीकृत करीब 1200 डॉक्टर हैं, जिनके पास 250 से अधिक क्लीनिक, करीब 400 नर्सिंग होम और करीब 250 पैथालॉजी लैब व एक्स-रे सेंटर हैं। सबसे अधिक क्लीनिक, नर्सिंग होम और लैब बेतियाहाता मोहल्ले में हैं। शहर के बीचोबीच सबसे व्यस्त इलाके में इन डॉक्टर्स की क्लीनिक, नर्सिंग होम और अस्पताल के सामने पार्किंग की समस्या सबसे विकराल है। पार्किंग के अभाव में लोग सड़क पर गाड़ियां खड़ी करते हैं, जिससे हर दिन जाम लगता है।
मेडिसिटी योजना लांच होने पर सबसे अधिक चर्चा इसकी ही थी कि जिनके पास जगह कम है, वे लोग मेडिसिटी में अपना अस्पताल बनाएंगे तो शहर में जाम से मुक्ति मिलेगी। दूसरे मेडिसिटी विकसित होने पर गोरखपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्र के अलावा पड़ोसी जिलाें देवरिया और कुशीनगर के लोगों को इलाज के लिए शहर में नहीं भटकना पड़ेगा।

दवा मंडी में है गोदाम का अभाव

बेतियाहाता की तरह ही पूर्वांचल की दवा की सबसे बड़ी मंडी भालोटिया मार्केट में भी पार्किंग की समस्या है। इसके अलावा इस थोक मंडी में गोदाम की भी समस्या है। शहर के विभिन्न हिस्सों में दवा व्यापारियों ने गोदाम बना रखे हैं। जब वहां से मंडी में दवा मंगाते हैं तो जाम लग जाता है। अगर भालोटिया दवा मंडी के लिए गोदाम मेडिसिटी में होता तो वहां न सिर्फ माल पहुंचाना आसान होगा, बल्कि बाहर से आने वाले व्यापारियों को भी ले जाने में सुविधा होगी।



-

पुराने जाना नहीं चाहते, नयों के लिए हैं दिक्कतें



दवा की दुकान चलाने वाले आलोक चौरसिया बताते हैं कि बेतियाहाता ऐसी जगह है, जहां अलग-अलग विधा के तमाम डॉक्टर्स की क्लीनिक है। साथ ही पैथालॉजी, एक्स-रे सेंटर और दवा की दुकानें भी हैं। एक तरह से देखें तो हर गली अपने आप में एक मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल जैसी है। इसीलिए मरीज भी यहीं आना चाहते हैं। ऐसा इसलिए कि अगर एक डॉक्टर नहीं मिले तो उसी विशेषज्ञता वाले दूसरे डॉक्टर मिल जाएंगे। एक पैथालॉजी में भीड़ है तो दूसरी में जांच करा लेंगे। यही हाल दवाओं का है। इसीलिए डॉक्टर यहां के बजाय ऐसी जगह नहीं जाना चाहते, जहां अभी उनके लिए सब कुछ नया होगा।





बड़े अस्पताल खुलने पर ही बनेगी बात : डॉ. वाई सिंह

आईएमए के सचिव डॉ. वाई सिंह का कहना है कि मेडिसिटी योजना तो ठीक है, लेकिन प्लॉट बड़े और महंगे हैं। जाे लोग शहर में अपना क्लीनिक बना चुके हैं, वे करोड़ों रुपये खर्च कर वहां क्यों जाएंगे। दूसरी समस्या यह है कि नए डॉक्टर ऐसी जगह नहीं जाना चाहेंगे, जहां अभी सब कुछ नए सिरे से व्यवस्थित हो रहा हो। अगर वहां निजी क्षेत्र के बड़े अस्पताल खुलेंगे तो नए डॉक्टर भी वहां जाएंगे और मरीज भी आएंगे। एक बार व्यवस्था बन जाएगी तो फिर राह आसान हो जाएगी।
विज्ञापन






वर्जन



खोराबार मेडिसिटी योजना में यशोदा अस्पताल समेत कई बड़े ग्रुपों ने रुचि दिखाई है। करीब आधे प्लाॅटों का आवंटन हो भी चुका है। शेष के लिए फिर से पंजीकरण कराया जा रहा है। कई डॉक्टर क्लीनिक के लिए जमीन देख भी चुके हैं। पैथालॉजी सेक्टर के लिए कम प्लॉट आवंटित हुए हैं। जैसे ही अस्पताल और क्लीनिक आएंगे तो पैथालॉजी वाले भी आना शुरू हो जाएंगे।

-आनंद वर्द्धन, उपाध्यक्ष, गोरखपुर विकास प्राधिकरण
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें