गोरखपुर। एडीजी कार्यालय में गलत तरीके से संबद्ध हुए पुलिसकर्मियों का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। चर्चा है कि संबद्धता के इस खेल के खिलाड़ी अपने ही बुने जाल में उलझ गए। अब दो पुलिसकर्मियों पर बर्खास्तगी की तलवार लटक गई है।
दरअसल, एडीजी जोन डॉ. केएस प्रताप ने गोरखपुर में कार्यभार संभालते ही कार्यालय के मठाधीशों पर नजर गड़ा दी थी। पहले कार्यालय में बैठकी खत्म करने के लिए सख्ती दिखाई, फिर मातहतों को अनुशासन का पाठ भी पढ़ाया। इस बीच फरवरी के प्रथम सप्ताह में एडीजी को मिले गोपनीय पत्र ने पूरे खेल की कलई ही खोल कर रख दी।
आरंभिक जांच में खिलाड़ी कोटे से गलत तरीके से संबद्धता, फिर विवादित जमीनों की पैरवी का मामला सामने आने पर गोपनीय सहायक समेत 56 पुलिस कर्मियों को मूल तैनाती स्थल पर भेजते हुए विभागीय जांच शुरू करा दी गई। अब इनमें से दो पुलिस कर्मियों पर बर्खास्तगी की तलवार लटकी है।
डॉ. केएस प्रताप ने चार जनवरी काे गोरखपुर जोन के एडीजी का पदभार ग्रहण किया। वह पहले यहां एसएसपी रह चुके हैं, लिहाजा उन्हें जिले की जानकारी थी। उनके पास तमाम लोग अपनी शिकायत लेकर पहुंचने लगे। इस दौरान एडीजी को वह एक गोपनीय पत्र मिला, जिसमें संबद्ध पुलिस कर्मियों के खेल का पूरा वृतांत था। गुमनाम पत्र की जांच एएसपी अंशिका वर्मा से कराई गई। जांच में गलत तरीके से खिलाड़ी बन संबद्ध होना पाया गया। इसके अलावा कुछ पुलिसकर्मियों के जमीन के धंधे में भी संलिप्तता की जानकारी हुई।
इस पर विवादित जमीन के धंधे की जांच एसपी सिटी और गलत तरीके से खिलाड़ी बनने के मामले की जांच एसपी संतकबीरनगर को सौंपी गई। आरंभिक जांच में सामने आया कि गोपनीय सहायक का तबादला पुलिस की किसी दूसरी शाखा में हुआ था, लेकिन उसने अपने तिकड़म से खुद को एडीजी कार्यालय में संबद्ध करा लिया। इसकी जांच भी एसपी संतकबीरनगर को सौंपी गई है। संबद्धता में संलिप्त मिलने पर एसपी संतकबीरनगर ने दो पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई भी कर दी।
गोपनीय सहायक (सीए बाबू) अमित कुमार श्रीवास्तव समेत 56 कर्मचारियों को मूल तैनाती पर भेजते हुए विस्तृत जांच का निर्देश दिया है। इस जांच की रिपोर्ट के आधार पर दो पुलिसकर्मियों की बर्खास्तगी की भी संभावना जताई जा रही है।
सीबीसीआईडी में हुआ था सीए बाबू का स्थानांतरण
जांच में पुष्टि हुई कि संतकबीरनगर में रहते हुए गोपनीय सहायक (सीए बाबू) अमित कुमार श्रीवास्तव का स्थानांतरण सीबीसीआईडी में हुआ था, लेकिन इसे छिपाकर उन्हें एडीजी कार्यालय से संबद्ध कर दिया गया। इसके बाद उन्हें मूल तैनाती स्थल पर भेज दिया गया। खिलाड़ियों की गलत तरीके से संबद्धता मामले में बड़े बाबू संतोष कुमार की भूमिका संदिग्ध मिलने पर उन्हें सिद्धार्थनगर भेज दिया गया। वहीं किरन यादव को कुशीनगर और रेनू पांडेय को संतकबीरनगर भेज दिया गया। इनकी विभागीय जांच भी चल रही है।
एडीजी के नाम पर एसओ को अर्दब में लेता था सीए बाबू
गलत तरीके से एडीजी दफ्तर में संबद्धता पाने वाले सीए बाबू अमित कुमार श्रीवास्तव, थानेदारों को एडीजी के नाम पर ही अर्दब में लेता था। एडीजी का नाम सुनते ही थानेदार बिना सही गलत देखे की एकतरफा कार्रवाई करा देते थे। जांच शुरू होने के साथ ही पुलिस वालों ने अपने सोशल मीडिया ग्रुप पर इसकी चर्चा भी शुरू कर दी है। वह एक दूसरे से चर्चा कर बता रहे हैं कि किस तरह से पूरे प्रकरण में गलत पैरवी की जाती थी। जांच में भी इसकी पुष्टि हुई है कि ज्यादातर मामलों में महिला सिपाही ही फोन करती थी। फोन पर वह सीधे यही कहती थी-प्रार्थना पत्र देने वाले आवेदक पुलिस पर उगाही का आरोप लगा रहे हैं। अब इन्हें साहब के सामने पेश करने जा रही हूं, प्रगति बता दें, आवेदक के प्रार्थना पत्र पर क्या कार्रवाई की गई। अगर, गलती से थानेदार यह बोल देता कि वह झूठा आवेदन दे रहे हैं तो फिर फोन पर यही जवाब मिलता था कि जांच में सब साफ हो जाएगा। इस घुड़की के बाद थानेदार भी मामले को रफा-दफा करने में ही भलाई समझते थे।
वर्जन
गलत तरीके से संबद्धता और विवादित जमीन में पैरवी की शिकायत मिलने पर जांच कराई गई थी। विवादित जमीन के धंधे की जांच गोरखपुर एसपी सिटी, गलत तरीके से खिलाड़ी बनने के मामले की जांच एसपी संतकबीरनगर को सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट मिलने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. केएस प्रताप, एडीजी गोरखपुर जोन