निवेश की अवधि पूरी होने पर भाग निकले थे चेयरमैन और निदेशक
वर्ष 2017 से ही बंद है गोरखपुर शाखा का कार्यालय
गोरखपुर। कैंट इलाके में निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की जालसाजी के मामले में आरोप है कि टाइम सिटी के चेयरमैन और निदेशक ने निवेशकों को छह वर्ष में रुपये दोगुना करने का झांसा दिया था। साथ ही ताल कंदला में प्लॉट दिखाकर बताया था कि निवेश की अवधि पूरी होने पर रुपये लेने की जगह वे प्लॉट भी ले सकते हैं। इस झांसे में कई लोग फंस गए और अब रकम गंवा कर पछता रहे हैं।
पीड़ित राममिलन ने बताया कि वह ऑटो चलाते थे। वर्ष 2014 में उन्हें और परिचितों को चंद्र प्रकाश शुक्ला ने कंपनी की स्कीम के बारे में समझाया। उन्हें फर्जी प्रमाणपत्र, आरबीआई का लाइसेंस व जमीन का कागजात दिखाकर झांसे में लिया। कहा कि कंपनी में जो भी धनराशि जमा होगी, उसे छह वर्ष में दोगुना करके वापस कर दिया जाएगा। यदि धनराशि नहीं लेते हैं तो उन्हें पूर्ण विकसित रिहाइश (भू-खंड) की रजिस्ट्री कर दी जाएगी।
इसके लिए ताल कंदला के पास जमीन भी दिखाई थी। स्कीम से प्रभावित होकर उन्होंने और परिचितों ने करीब 12 लाख रुपये निवेश कर दिया। समयावधि पूरी होने पर जब धनराशि वापस लेने गया तो पता चला कि चंद्र प्रकाश शुक्ला और उसके साथी 1/32 विनम खंड, गोमतीनगर, लखनऊ में निवेशकों के रुपये से खरीदी गई जमीन को बेच रहे हैं। आरोप लगाया कि कंपनी के खाते में जमा रुपये को अपने ही परिवार के सदस्यों के नाम से फर्जी वाउचर बनाकर बैंक खातों में ट्रांसफर कर गबन कर लिया।
एजेंट बन करवा दिया निवेश
राममिलन ने बताया कि पहले वह कंपनी के साथ निवेशक के रूप में जुड़े। इसके बाद उसे कंपनी का एजेंट बनने के फायदे बताए गए। झांसे में आकर उन्होंने अपने परिचितों से भी निवेश करवा दिया। बताया कि उसके जैसे 50 से भी ज्यादा निवेशक हैं, जिन्होंने 200 से अधिक लोगों से निवेश करवा दिया। अब निवेशकों की जमा धनराशि का समय पूरा होने पर न तो रुपये वापस किए जा रहे हैं और न ही भूखंड की रजिस्ट्री की जा रही है। आरोपियों से संपर्क कर रुपये व भूखंड की रजिस्ट्री की मांग की तो जान से मारने की धमकी दी।
2017 से ही बंद है शाखा
कंपनी से जुड़े लोगों ने वर्ष 2010 में जब काम शुरू किया तो छात्रसंघ चौराहे के पास किराये के मकान में शाखा कार्यालय खोला था। यहीं पर निवेशकों की मीटिंग होती थी। कुछ वर्षों तक यहीं से लोगों को प्लान समझाया गया। इसके बाद वर्ष 2017 में यह कार्यालय बंद हो गया। इसके बाद से कंपनी के निदेशक लखनऊ से आकर होटल में मीटिंग लेते थे। लोगों को झांसे में लेने के बाद ताल कंदला स्थित प्लॉट को दिखाते थे। बताया जा रहा है कि कुछ वर्ष पहले से ही चेयरमैन व निदेशकों ने गोरखपुर में आना बंद कर दिया था।
हाल ही में हुई है कोऑपरेटिव कंपनी में के नाम पर जालसाजी
द लोनी अर्बन मल्टी स्टेट थेफ्ट कोऑपरेटिव सोसाइटी ने शहर में निवेश के नाम पर करीब 500 लोगों के आठ करोड़ रुपये डूब गए हैं। मामले में संजय अग्रहरि की तहरीर पर कोतवाली में 11 लोगों पर केस दर्ज हुआ है। इसमें वाराणसी के मुरारी मिश्रा, बाबूलाल गुप्ता, राघवेंद्र तिवारी, बीएल गुप्ता, पुणे के समीर अग्रवाल, सानिया अग्रवाल, शबाब हुसैन, अनूप जैन, संजय मुद्गिल, आरके शेट्टी, अभय राय शामिल हैं। इसमें समीर अग्रवाल कंपनी का सीएमडी है। हालांकि, पीड़ितों का कहना है कि इसमें मुरारी मिश्रा भी पीड़ित है। उसके भी लाखों रुपये लेकर आरोपी भाग गए हैं। कोतवाली पुलिस मामले की जांच में जुटी है। कंपनी के सीएमडी समीर अग्रवाल पर शाहपुर थाने में पहले से ही केस दर्ज है जिसकी जांच पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) को सौंपी जा चुकी है।